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जॉब नेचर में हो सकता है बड़े पैमाने पर बदलाव, नीति आयोग के सीईओ बोले- औद्योगिक क्रांति-4.0 की ओर बढ़ा रहे कदम

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के मुताबिक, कोरोनावायरस के चलते लगे लॉकडाउन की वजह से देशभर में सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी और काम की प्रकृति में भी बदलाव आएगा।

नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत। (फोटो- एक्सप्रेस)

कोरोनावायरस के चलते लगे लॉकडाउन से भारत की सप्लाई चेन बड़े स्तर पर बाधित हो सकती है। इसके साथ ही देश में जॉब नेचर में भी बदलाव आ सकता है। यह कहना है NITI आयोग के सीईओ अमिताभ कांत का। अमिताभ ने कहा, “कोरोनावायरस महामारी ने देश के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती खड़ी कर दी है, जो कि उलझी और अप्रत्याशित है। आखिर कैसे हम अपने लोगों को नई तरह की जॉब के लिए तैयार करेंगे? हम अब पूरी तरह नई दुनिया की तरफ बढ़ रहे हैं। हमें अब नए कोर्स की जरूरत है। हमारे आईआईटी, इंजीनियरिंग और शिक्षा संस्थान अपपने पाठ्यक्रम के साथ आउटडेटेड हैं। हम औद्योगिक क्रांति 4.0 के बीच में हैं।”

अमिताभ कांत ने ये बातें वर्ल्ड बैंक के कंट्री डायरेक्टर जुनैद अहमद, हीरो एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील मुंजाल, नैसकॉम के अध्यक्ष देबजानी घोष, टीम लीज के चेयरमैन मनीष सभरवाल औj अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक अभिराज भाल के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहीं।

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कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ही वर्ल्ड बैंक के जुनैद ने कहा कि जल्द ही हमारे काम करने के तरीकों में आधारभूत बदलाव होंगे। बदलाव जलवायु परिवर्तन के झटकों के साथ ही शुरू हो गए थे। इससे दुनियाभर में अर्थव्यवस्था बदली। एक दशक पहले ही हमें लगता था कि जलवायु परिवर्तन का विकासशील देशों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और हम एडजस्ट नहीं कर पाएंगे। भारत ने अपने संसाधनों को नवीकरणीय ऊर्जा बनाने में लगाया और ऊर्जा की प्रकृति ही बदल दी। यह बदलाव अभी तक जारी है। कोरोनावायरस की वजह से दुनिया में बदलाव आएगा और यह बदलाव ऐसा होगा कि हम वापस नहीं जाना चाहेंगे। हमें इससे अलग तरह का हेल्थ सिस्टम मिलेगा। अलग तरह की इन्फॉर्मल इकोनॉमी मिलेगी, जो कि आने वाले समय में सामान्य हो जाएगा।

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नैसकॉम के अध्यक्ष देबजानी घोष ने कहा कि अगर हमने इस मौके को बदलावों को लागू करने में नहीं लगाया, तो यह हमारा ही नुकसान होगा। उन्होंने टीसीएस के सीईओ राजेश गोपीनाथन के बयान को दोहराते हुए कहा कि अब हमें अपनी प्रोडक्टिविटी के लिए पूरी 100 फीसदी नहीं लौटना है। यह 25% भी हो सकता है। टीसीएस कह चुका है कि आने वाले समय में हम 25-25 होंगे। यानी सिर्फ 25 फीसदी स्टाफ ही कैंपस में होगा। बाकी सब घर से ही काम करेंगे। हम ऑनलाइन और ऑफलाइन का मिक्स होंगे। इससे बदलाव आएगा। हमारे काम करने की जगह बदलेगी। इससे गिग इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। क्योंकि आप घर से काम करेंगे, इसलिए आपकोसमझ आएगा कि आपके पास कई काम करने के मौके हैं। साथ ही इससे काम में लैंगिक संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। यह आधारभूत बदलाव कहीं नहीं जा रहे। एक इंडस्ट्री के तौर पर हमें बिजनेस मॉडल को री-इनवेंट करना होगा।

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