देश की संसद में बुधवार को उस दौरान जमकर हंगामा हो गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने भाषण के दौरान लोकसभा में कुछ किताबें लहराई और किताब के हवाले से सदन में गांधी-नेहरू परिवार को लेकर बयान दिया। इस पर विपक्ष नाराज हो गया और लोकसभा स्पीकर से भाजपा सांसद की शिकायत की।

प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने किताबें दिखाईं लेकिन उनका माइक बंद नहीं हुआ, जबकि माइक बंद कर राहुल गांधी को किताब से कोट करने नहीं दिया गया था।

इस हंगामे को लेकर भाजपा सांसद ने बुधवार शाम को मीडिया से बात की और कहा कि ये वो पुस्तकें हैं जो प्रकाशित तो हुई हैं लेकिन भारत में बैन हैं।

कई किताबें की दिखाईं कवर पेज

उन्होंने एक पेज दिखाते हुए कहा कि यह चार्ल्स के द्वारा लिखी गई किताब है इंडिया इंडिपेंडेंट। इस किताब में कहा गया कि माउंट बेटन और एडविना के साथ मिलकर किस तरह जवाहर लाल नेहरु ने भारत का बंटवारा कर दिया। इसमें पूरा इतिहास है और इसे 1964 में बैन कर दिया गया। आगे एक और पेज दिखाते हुए कहा कि दूसरी की किताब का नाम है एडविना और नेहरू, ये एक नोवेल है। उन्होंने दावा किया कि इस किताब में ये है कि कितने बजे और कहां नेहरू एडविना के साथ घूमते थे और उनको कैसे देश की राजनीति से मतलब नहीं था। ये किताब भी बैन है।

एक अन्य पेज दिखाते हुए सांसद ने कहा कि द लाइफ ऑफ इंदिरा एंड नेहरू, ये किताब भी बैन है। चौथी किताब है नेहरू, ये माइकल ब्रेचर की किताब है। इस किताब में बताया गया कि कैसे नेहरू ने देश को विखंडित करने से लेकर पूरी जानकारी है। एक और पेज दिखाते हुए कहा कि ये सबसे मजेदार किताब है मथाई साहब की। मथाई साहब नेहरू के 12 साल तक पीए थे। उन्होंने दावा किया इंदिरा, नेहरू के साथ पत्नी की तरह रहती थीं और किस तरह भ्रष्ट्राचार किया। ये किताब भी बैन है।

‘नेपाल’ किताब का कवर पेज भी दिखाया

एक और किताब के कवर पेज दिखाते हुए निशिकांत दुबे कहा कि ये किताब है सीजफायर, इसमें बताया गया कि 1962 में किस तरह से सीज फायर हुआ और उस दौरान भारतीय सेना का मनोबल कैसे गया और चीन हमारी सीमा में कैसे घुस गया, ये वो किताब है ये भी बैन है। एक और पेज दिखाते हुए उन्होंने कहा कि ये किताब है ‘द हार्ट ऑफ इंडिया’, इस किताब में यह कहा गया कि कैसे गांधी नेहरू परिवार ने बंटवारा कर देश की संस्कृति बर्बाद की। एक और पेज दिखाते हुए कहा कि एक किताब है नेपाल, इसमें बताया गया कि सोनिया गांधी एक बार गई थीं पशुपति नाथ दर्शन के लिए लेकिन उन्हें वहां घुसने नहीं दिया गया तो तत्कालीन सरकार ने नेपाल का दाना-पानी बंद कर दिया। एक और किताब अजीज बेग की कैपटिव कश्मीर भी बैन है, इसमें बताया गया कि कैसे उन्होंने 370 और 35ए लगाकर कश्मीर में गंभीर अवस्था पैदा कर दी।

उन्होंने कहा कि एक और किताब है हिमालयन बलंडर, ये भी काफी समय तक बैन रहा। इसमें नेहरू की कई गलतियों का जिक्र है। ये कुछ किताबें ऐसी हैं जो भारत सरकार की ओर से बैन हैं लेकिन छपी हुई हैं। हम चाहते हैं कि इन पर चर्चा हो।

इन किताबों का भी किया जिक्र

आगे कहा कि अब कुछ किताब ऐसी हैं जो बैन नहीं है भारत में बिक रही है, ये मित्रोखिन अर्काइव, इसका दो-दो वॉल्यूम है। इनमें ये है कि कैसे पूरी कांग्रेस पार्टी, इंदिरा जी के साथ कैसे केजीबी के हाथों में बंधक थी। मित्रोखिन बहुत बड़ा आदमी थी। इसके बाद हैं कुलदीप नैय्यर , ये भी बड़े पत्रकार थे।, इनकी किताब है इमरजेंसी रिटोल्ड। इसमें है कि कैसे करप्शन हुआ, कैसे इमरजेंसी लगी, कैसे लोगों को रोका गया, कैसे संविधान को बदला गया। पत्रकार कुमी कपूर की किताब द इमरजेंसी इस किताब पर भी चर्चा होनी चाहिए। ये सभी किताब ऐसी है जिनमें कहा गया कि कैसे भारत से लोकतंत्र कैसे खत्म किया, लोकतंत्र का गला कैसे घोटा, कैसे पत्रकारिता को रोका।

आगे कहा कि संजय बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पर भी चर्चा क्यों नहीं होगी? या ‘द रेड सारी’ जो पहले बैन थी, लेकिन अब मिल रही है। इन पर भी चर्चा होनी चाहिए। एक और किताब ‘दरबार’, ये तवलीन जी की किताब है। एक किताब है चित्रा सुब्रमण्यम की बोफोर्स गेट, शशि थरूर की द ग्रेट इंडिया नोवेल, सांसद शशि से खुद पूछें कि उन्होंने गांधी, नेहरू परिवार पर क्या कहा है। इसके बाद इंडिया ट्रस्ट विथ डेस्टिनी, नयनतारा सहगल की इंदिरा गांधी ट्राइस्ट विद पावर, क्रिस्टोफर जेफर की इंडियास फर्स्ट डिक्टेटरशिप, इंडियन समर, बिफोर मेमरी फेड्स और एक अप्रकाशित किताब की जिक्र किया, जिसमें 1962 के जंग से जुड़ी भारत की स्थिति का जिक्र है।

‘संसद में चर्चा के बाद गांधी-नेहरू परिवार का पर्दाफाश होगा’

आगे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “ये तो वो किताबें हैं जो प्रकाशित तो हुई हैं लेकिन भारत में बैन हैं। तीन दिन से संसद की कार्यवाही एक ऐसी किताब के कारण रुक गई जो कहीं भी प्रकाशित नहीं हुई थी। मैं अध्यक्ष से आग्रह करता हूं और यही बात मैंने संसद में भी कही थी कि प्रकाशित किताबों पर चर्चा होनी चाहिए और जनता को 2014 से पहले की कहानी पता चलनी चाहिए, जिसके बारे में अधिकांश आबादी को कोई जानकारी नहीं है, इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। संसद में चर्चा के बाद गांधी-नेहरू परिवार का पर्दाफाश होगा।”

पत्र भी किया शेयर

इसके अतिरिक्त उन्होंने एक्स पर एक पत्र भी शेयर किया, जो जवाहर लाल नेहरू ने एडविना को लिखा था, पत्र में जवाहर लाल नेहरू ने यह पत्र करियप्पा के नाम लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा, “अगर आप एडविना माउंटबेटन मेमोरियल फंड के लिए कोई नृत्य प्रस्तुति या कोई अन्य कार्यक्रम आयोजित करें तो यह बहुत अच्छा होगा।” आगे पढ़िए हिन्दुओं द्वारा माँ काली मंदिर के जीर्णोद्धार पर विवाद क्यों? निशिकांत दुबे ने किया बड़ा ऐलान