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बीजेपी के 9 सांसदों ने डाल दिया था GST Bill के विरोध में वोट, कांग्रेसियों ने सुधरवाई गलती

गुड्स एंड सर्विसेज(जीएसटी) संविधान संशोधन बिल 3 अगस्‍त को राज्‍य सभा में पूर्ण बहुमत के साथ पास हो गया।
गुड्स एंड सर्विसेज(जीएसटी) संविधान संशोधन बिल 3 अगस्‍त को राज्‍य सभा में पूर्ण बहुमत के साथ पास हो गया।

गुड्स एंड सर्विसेज(जीएसटी) संविधान संशोधन बिल 3 अगस्‍त को राज्‍य सभा में पूर्ण बहुमत के साथ पास हो गया। बिल के विरोध में एक भी सदस्‍य नहीं था, पर वोटिंग के दौरान अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। भाजपा के ही नौ सांसदों ने बिल का विरोध कर दिया। उन्‍होंने गलती से विरोध वाला बटन दबा दिया। इससे सदन में हंसी फूट पड़ी। कांग्रेसी सांसदों को चिल्‍लाते हुए और टिप्‍स देते सुना गया। उन्‍होंने कहा कि बिल के समर्थन के लिए हरा बटन दबाओ। तब उन्‍होंने गलती सुधारी। मूल बिल के समर्थन में 197 वोट पड़े। इसके बाद जब प्रत्‍येक नियम के लिए वोटिंग हुई तो इसमें संख्‍या में भिन्‍नता नजर आर्इ। इस दौरान वोटिंग के नंबर 197 से 203 के बीच बदलते रहे। इस पर सीपीएम के सीताराम येचुरी ने कहा, ” जीएसटी से पहले ही चमत्‍कार हो रहे हैं, नंबर ऊपर जा रहे हैं।” इस पर जेटली ने हंसते हुए हाथ जोड़ जवाब दिया।

जीएसटी पर वोटिंग के दौरान दो और बातें भी रोचक रहीं। ये थी देश के प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री की चुप्‍पी। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह राज्‍यसभा के सदस्‍य हैं और वे सदन में मौजूद थे लेकिन बिल को लेकर उन्‍होंने एक भी शब्‍द नहीं कहा। हालांकि उन्‍होंने वोटिंग में हिस्‍सा लिया। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए और वे गैरमौजूद रहे। बाद में कांग्रेस के जयराम रमेश ने चुटकी भी ली कि लगता है संसद पीएम मुक्‍त हो गई है।

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इस बिल पर जयललिता की पार्टी अन्‍नाद्रमुक को छोड़कर किसी ने आपत्ति नहीं जताई और सभी पार्टियों ने आपसी विरोध से ऊपर उठकर समर्थन किया। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बिल के आसानी से पास होने के लिए कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं से व्‍यक्तिगत रूप से मुलाकात कर समर्थन मांगा था। इसके बाद बिल के पास होने का रास्‍ता साफ हो गया था। इसी का नतीजा था कि बिल को लेकर सभी पार्टियां समर्थन में दिखीं। हालांकि टैक्‍स रेट को 18 प्रतिशत रखने और राज्‍य व केंद्र के जीएसटी के संबंध में आने वाले बिल को फाइनेंस बिल के रूप में ही पेश करने की मांग की गई। हालांकि इस पर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बिना बिल का ड्राफ्ट दिए वे कोई वादा नहीं कर सकते।

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