उरी हमला: NIA नहीं जुटा पाई आतंकियों के “गाइड्स” के खिलाफ कोई सबूत, दोनों की हो सकती है POK वापसी

सितंबर 2016 में हुए उरी हमले के मामले में भारत, आतंकियों के दो ‘गाइड’ के खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा पाई है।

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उरी हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। (फाइल फोटो)

बीते साल सितंबर महीने में हुए उरी हमले के मामले में भारत, आतंकियों के ‘गाइड’ के खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा पाई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकियों की मदद करने वाले 2 गाइड को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। पीओके के फैजल हुसैन अवान और अहसान खुर्शीद पर पिछले साल 18 सितंबर को आर्मी कैंप में हुए हमले में आतंकियों की मदद करने का आरोप था लेकिन एनआईए के पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाने की वजह से यह फैसला लिया गया है। एजेंसी ने दोनों के खिलाफ जांच रिपोर्ट बंद करने का फैसला किया है। दोनों के खिलाफ भारतीय सेना को दिए गए बयान के अलावा कोई और पुख्ता सबूत नहीं मिल पाए।

फैजल और अहसान, दोनों ही अब क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद वापस पाकिस्तान जा सकेंगे। वहीं भारत-पाकिस्तान, दोनों देशों के बीच ‘दोस्ताना’ संबंध बढ़ाने की कोशिश के चलते भी इन्हें वापस भेजने की योजना है। पीओके में इनकी वापसी की तारीख गृह मंत्रालय की तरफ से तय की जाएगी। गौरतलब है पिछले महीने गलती से भारतीय सेना के एक जवान चंदू चव्हाण गलती से पाकिस्तानी सीमा पार चले गए थे। च्वहाण की हाल ही में सुरक्षित अपने देश में वापसी हुई है। ऐसे में इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि फैजल और अहसान, दोनों को ही वापस इनके घर भेजा सकता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि एनआईए ने क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में सौंप दी है और रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने से इन्हें आरोपों से बरी किया जाता है। वहीं गौर करने वाली बात यह भी है कि दोनों युवाओं को लेकर कुछ मीडिया ग्रुप्स का यह भी दावा रहा है कि लड़के नाबालिग हैं और 10वीं क्लास के स्टूडेंट हैं। हालांकि गौर करने वाली बात यह भी है कि सेना को दिए अपने शुरुआती बयान में दोनों ने खुलासा किया था कि उन्हें जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर की तरफ से टास्क दिया गया था।

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