चुनाव आयोग ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मामलों से निपटने वाले न्यायिक अधिकारियों के घेराव की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंप दी। आरोप है कि सात न्यायिक अधिकारियों के इस समूह को मालदा जिले के कालियाचौक इलाके में स्थित एक बीडीओ कार्यालय में बंधक बना लिया गया था और वे वहां से निकल नहीं पाए। आठ घंटे बाद पुलिस ने उन्हें बचाया और जिस पुलिस वैन में वे यात्रा कर रहे थे। उस पर भीड़ ने पत्थर फेंके।
इस घटना का संज्ञान लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह आज ही इस मामले की जांच सीबीआई या एनआईए को सौंप दें। अदालत के आदेश का हवाला देते हुए, चुनाव आयोग ने एनआईए के महानिदेशक को पत्र लिखकर कहा, “मामले की आवश्यक जांच की जाए और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सीधे माननीय न्यायालय को प्रस्तुत की जाए।”
चुनाव आयोग के एक सूत्र ने बताया कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार को राज्य में पहुंचकर जांच शुरू करने वाली है। जानकारी के अनुसार, इससे पहले शाम को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक बैठक की।
मालदा की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
बता दें, मालदा की इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने मालदा जिले के एक गांव से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना बेहद निंदनीय है। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई।
शीर्ष अदालत से इसे न्यायिक अधिकारियों को डराने का दुस्साहसी प्रयास बताते हुए कहा कि यह न्यायालय के अधिकार को चुनौती देने जैसा है। अदालत के अनुसार, यह घटना न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है जो निहित स्वार्थों से प्रेरित लगता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह न्यायिक अधिकारियों पर मनोवैज्ञानिक हमले के लिए किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह कर्तव्य के निर्वहन में विफलता का मामला है और उन्हें अपनी निष्क्रियता के कारण बताने होंगे।
सीजेआई ने कहा कि यहां हर कोई राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। मैं रात 2 बजे तक खुद पूरे हालात पर नजर बनाए हुए था। हमें पता है कि यह किसकी हरकत है। पश्चिम बंगाल देश का सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से बंटा हुआ प्रदेश है। ध्रुवीकरण से ग्रस्त राज्य है। CJI ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों (जिनमें मुख्य सचिव भी शामिल हैं) को फटकार लगाते हुए कहा कि वो अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि सूचना मिलने के बावजूद अधिकारियों ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षित क्यों नहीं निकाला? सीजेआई ने कहा कि मालदा की घटना पूर्व नियोजित, सुनियोजित और प्रेरित थी और इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित कर पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारना था।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मालदा की घटना से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था अब उनके हाथों में नहीं है और अधिकारियों की सुरक्षा करने में विफल रहने के लिए चुनाव आयोग को दोषी ठहराया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मुझे किसी ने सूचित नहीं किया। प्रशासन मेरे हाथ में नहीं है। राज्य में कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के हाथ में है। वे गृह मंत्री अमित शाह की बात सुनते हैं। सब कुछ बदल गया है। मेरी शक्तियां चुनाव आयोग को सौंप दी गई हैं। यह ‘सुपर राष्ट्रपति शासन’ है।
सीएम बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग कानून और व्यवस्था को कंट्रोल करने में पूरी तरह विफल रहा है। सीएम ने कहा, “मेरी सारी शक्तियां छीन ली गई हैं।” मुर्शिदाबाद जिले में एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे (बंधकों के बारे में) आधी रात को एक पत्रकार से पता चला।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मैं समझती हूं कि लोग क्यों नाराज हैं।”
मैं 15 दिन तक बंगाल में ही रहूंगा, सब TMC को बाय-बाय कहना चाहते हैं: अमित शाह
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाल ली है। गुरुवार को वे शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में शामिल होने के लिए भवानीपुर पहुंचे और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा। पढ़ें पूरी खबर।
