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एनआईए अधिकारी हत्याकांड: दो गिरफ्तार, पुलिस का दावा- घरेलू विवाद के कारण हुई तंजील अहमद की हत्या

शुरुआत में पुलिस ने तंजील अहमद की हत्या को ‘‘सुनियोजित हमला’’ करार दिया था और आतंक के पहलू की संभावना से इनकार नहीं किया था।

Author बिजनौर | April 12, 2016 10:28 PM
पूर्व NIA अधिकारी तंजील अहमद (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की हत्या के सिलसिले में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार (12 अप्रैल) को इस मामले की गुत्थी सुलझा लेने का दावा किया । पुलिस ने यह दावा भी किया कि घरेलू विवाद की वजह से अहमद की हत्या की गई। बरेली क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) विजय कुमार मीणा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें एक अहमद का रिश्तेदार रेहान है ।

मीणा ने बताया कि मुनीर नाम का शख्स मामले का कथित मास्टरमाइंड हैं और वह अभी फरार है। उन्होंने कहा कि उसे भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ब्योरा देते हुए आईजी ने कहा कि दो और तीन अप्रैल की दरम्यानी रात जब तंजील अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक रिश्तेदार के विवाह समारोह से लौट रहे थे तब आरोपी उनका पीछा कर रहे थे।

दिल्ली से करीब 150 किलोमीटर दूर बिजनौर जिले के एक गांव में अपनी भांजी की शादी में शिरकत करने के बाद अहमद पड़ोस के ही सहसपुर गांव लौट रहे थे। हमलावर सहसपुर गांव में अपनी मोटरसाइकिल अहमद की कार से आगे ले आए और मुनीर ने कथित तौर पर एनआईए अधिकारी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जिससे उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस गोलीबारी में अहमद की पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, लेकिन उनके दोनों बच्चे बाल-बाल बच गए।

रेहान के साथ उसके साथी जैनुल को भी गिरफ्तार किया गया है। अपराध की मंशा के बाबत आईजी ने बताया कि घरेलू विवाद, पारिवारिक मामलों और संपत्ति में साझेदारी के मसलों की वजह से इस वारदात को अंजाम दिया गया।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक :डीजीपी: जावीद अहमद ने आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वालों को इनाम के तौर पर 50,000 रुपए देने का ऐलान किया है। हत्यारों ने अहमद को 24 और उनकी पत्नी फरजाना को चार गोलियां मारी थी। जिस वक्त गोलीबारी चल रही थी उस वक्त अहमद की 14 साल की बेटी और 12 साल का बेटा वैगन-आर कार की पिछली सीट से इस वारदात को देख रहे थे। अहमद और उनका परिवार इसी वैगन-आर कार में सवार था।

शुरुआत में पुलिस ने अहमद की हत्या को ‘‘सुनियोजित हमला’’ करार दिया था और आतंक के पहलू की संभावना से इनकार नहीं किया था। सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट रहे अहमद फरवरी 2009 में एनआईए की स्थापना के समय से ही इस जांच एजेंसी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। वह कई आतंकवादी हमलों की जांच टीम में शामिल थे।

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