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खोखला साबित हुआ नोटबंदी से नकली नोट पर लगाम का दावा, नक्‍कालों ने तीन महीने में ही निकाला 2000 के नोटों के सुरक्षा फीचर्स का तोड़

जालसाजों ने इस नई करेंसी नोट की हू-ब-हू फीचर्स की नकल की है। हालांकि उसकी पेपर क्वालिटी अच्छी नहीं है।

जांच करने पर पता लगा कि 17 में से 11 सिक्योरिटी फीचर्स नकल किए गए हैं।

8 नवंबर 2016 को रात आठ बजे जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नोटबंदी का एलान कर रहे थे तब यह दावा किया गया था कि नोटबंदी से आतंकियों और उग्रवादियों की कमर टूट जाएगी। इसके साथ ही यह भी दावा किया गया था कि असामाजिक तत्व अब फेक करंसी का कारोबार नहीं कर सकेंगे लेकिन सरकार के दावे खोखले साबित हुए। न तो आतंकी और उग्रवादी संगठनों का सफाया हुआ और न ही जाली करेंसी नोटों का कारोबार थमा। हद तो तब हो गई जब नई करेंसी आने के एक हफ्ते के भीतर ही देश में 2000 रुपये के नए जाली नोट मार्केट में आ गए। सीमा पार से दूसरे देशों से भी नकली नोटों की कई खेप अब तक भारत आ चुकी है। इसकी बानगी देखने को मिली बंगाल में जहां 6 दिन पहले ही मुर्शिदाबाद में फेक करेंसी के रैकेट का भांडाफोड़ हुआ।

अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने फिर से भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे एक गांव से 2000 रुपये के नए नोटों की फेक करेंसी बरामद की है जिसका मूल्य 2 लाख रुपये है। इससे पहले जाली नोटों की खेप भारत-बांग्लादेश सीमा से करीब 35 किलोमीटर दूर एक गांव में बरामद हुई थी। इस बार सुरक्षा एजेंसियों ने जिस गांव से बरामदगी की है वह गांव सीमा पर बाड़ेबंदी और इंटरनेशनल पिलर्स के बीच स्थित है। जाली नोटों की बरामदगी के लिए गठित स्पेशल टीम ने इलाके से उमर फारुक नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। 19 साल का फारुक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित गांव चुरियंतपुर का निवासी है।

उमर मंगलवार को अपने गिरोह के दूसरे लोगों से मिलने गया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि बुधवार की सुबह गांव में जाली नोटों की खेप पहुंचने वाली है। इस सूचना पर सुरक्षा एजेंसियों ने जाल बिछाकर दबिश दी और खेप पहुंचते ही उसे दबोच लिया। हालांकि, जाली नोटों की खेप पहुंचाने वाले गिरोह का कोई भी सदस्य पकड़ में नहीं आ सका। जांच एजेंसी का मानना है कि उमर सीमा पार से नकली नोटों का कारोबार करने वाले गिरोह का सदस्य है। गिरोह के लोग बॉर्डर पार से नकली नोट भारत की सीमा में भेजते हैं और फिर नकली नोटों को मार्केट में मिला देते हैं।

बीएसएफ और एनआईए की नजर फारुक पर 2015 से है जब उसे नकली नोटों की स्मगलिंग के आरोप में पकड़ा गया था। फारुक के पास से करीब 6 लाख रुपए के नकली नोट बरामद हुए थे। मंगलवार को भी जब वउमर की गिरफ्तारी हुई थी तब उसके पास से 2000 रुपये के तीन नकली नोट मिले थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि उमर का पूरा परिवार इस गोरखधंधे में शामिल है। अभी भी उसके परिवार के तीन लोग नकली नोटों का धंधा करने के आरोप में जेल में बंद हैं। इस इलाके की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि ये लोग बड़ी आसानी से कभी बांग्लादेश तो कभी भारत में प्रवेश कर जाते हैं।

मुर्शिदाबाद में बरामद नकली नोटों की क्वालिटी वैसी ही है जैसी उमर के गांव से बरामद हुई है। जालसाजों ने इस नई करेंसी नोट की हू-ब-हू फीचर्स की नकल की है। हालांकि उसकी पेपर क्वालिटी अच्छी नहीं है। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक फेक करेंसी का कलर भी असली नोटों जैसा नहीं है लेकिन बाकी फीचर्स वैसे ही हैं जैसे रिजर्व बैंक द्वारा छापी गई करेंसी में मौजूद है। आम आदमी इनमें आसानी से फर्क नहीं कर सकता है। अधिकारियों के मुताबिक ये नोट पाकिस्तान से नहीं लाए गए हैं बल्कि बांग्लादेश के ही एक छोटे से गांव में छापे गए हैं।

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