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लोकसभा से पारित होने वाला क्या है NIA संशोधन विधेयक? जानें, विपक्ष किन बातों से है परेशान

सदन में कुछ सदस्यों द्वारा स्पष्टीकरण मांगने पर गृह मंत्री अमित शाह बोले, "आतंकवाद का कोई राइट या लेफ्ट नहीं होता। आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद होता है।"

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संसद के निचले सदन यानी कि लोकसभा में सोमवार (15 मई, 2019) को राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित हुआ। बिल के तहत नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के मामले का पंजीकरण करने और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इस विधेयक को लेकर विपक्ष के कुछ सदस्यों ने आपत्ति और विरोध भी जताया और कहा कि यह भारत को ‘पुलिस राज्य’ बनाकर खत्म कर देगा। इस विधेयक पर चर्चा के बीच गृह मंत्री अमित शाह और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी में नोकझोंक भी हुई।

शाह से ओवैसी बोले, “आप गृह मंत्री हैं तो डराइए मत।” इसी पर गृह मंत्री का जवाब आया- हम डरा नहीं रहे हैं, पर अगर डर जहन में है तो क्या किया जा सकता है। शाह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद पर काबू पाने के लिए दक्षेस देशों के क्षेत्रीय समझौते (सार्क रीजनल कन्वेंशन ऑन सप्रेशन ऑफ टेररिज्म) पर हस्ताक्षर नहीं किए, पर भारत के पास उससे निपटने के लिये ‘सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक जैसे अन्य तरीके’ हैं। कुछ सदस्यों द्वारा स्पष्टीकरण पर गृह मंत्री बोले, “आतंकवाद का कोई राइट या लेफ्ट नहीं होता। आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद होता है।”

वहीं, गृह राज्य मंत्री रेड्डी बोले कि इस संशोधन विधेयक का मकसद एनआईए अधिनियम को मजबूत बनाना है। आज आतंकवाद बहुत बड़ी समस्या है, देश में ऐसे उदाहरण हैं जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री आतंकवाद के शिकार हुए हैं। आतंकवाद आज अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या है। ऐसे में हम एनआईए को सशक्त बनाना चाहते हैं। उनके मुताबिक, आतंकवाद पर केंद्र सरकार राज्यों संग काम करेगी। दोनों में तालमेल रहेगा।

कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने दावा किया कि जब विभिन्न अदालतों में एनआईए अधिनियम की असल संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, तब यह संशोधन नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने कहा कि एनआईए का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने का कोई मतलब नहीं है। बकौल ओवैसी, “हमें अमेरिका और इजरायल बनने की कोशिशें नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनके यहां आदर्श स्थिति में लोकतंत्र नहीं है।”

क्या कहता है विधेयक?: विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण संशोधन विधेयक 2019 उपबंध करता है कि अधिनियम की धारा 1 की उपधारा 2 में नया खंड ऐसे लोगों पर अधिनियम के उपबंध लागू करने के लिए है, जो भारत के बाहर भारतीय नागरिकों के विरुद्ध या भारत के हितों को प्रभावित करने वाला कोई अनुसूचित अपराध करते हैं। अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 का संशोधन करके एनआईए के अधिकारियों की वैसी शक्तियां, कर्तव्य, विशेषाधिकार और दायित्व प्रदान करने की बात कही गई है जो अपराधों के अन्वेषण के संबंध में पुलिस अधिकारियों द्वारा न केवल भारत में बल्कि भारत के बाहर भी प्रयोग की जाती रही है।

बिल में भारत से बाहर किसी अनुसूचित अपराध के संबंध में एजेंसी को मामले का पंजीकरण और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है। कहा गया है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के अधीन अपराधों के विचारण के मकसद से एक या अधिक सत्र अदालत, या विशेष अदालत स्थापित करें। (पीटीआई-भाषा इन्पुट्स के साथ)

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