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NHRC का केंद्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा सरकारों को नोटिस, कहा- आप नागरिकों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते

एनएचआरसी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि संबंधित प्राधिकारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए वर्षभर उचित कदम नहीं उठाए जो क्षेत्र के निवासियों के जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन के समान है।

Author नई दिल्ली | November 9, 2017 6:03 PM
आयोग ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में जानलेवा प्रदूषण को गंभीरता से लिया गया। (Representative Image)

एनएचआरसी ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के जानलेवा स्तर के मद्देनजर केंद्र और दिल्ली, पंजाब एवं हरियाणा की सरकारों को गुरुवार को नोटिस भेजे। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन के समान इस खतरे से निपटने के लिए उचित कदम नहीं उठाने को लेकर प्राधिकारियों की निंदा की। पैनल ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और तीनों राज्यों की सरकारों से हालात से निपटने के लिए उठाए जा रहे एवं प्रस्तावित प्रभावशाली कदमों की दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। उसने एक बयान में कहा, ‘‘सरकार जहरीली धुंध के कारण अपने नागरिकों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकती।’’ पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं राजमार्ग के केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की सरकारों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किए गए हैं।

आयोग ने कहा कि उसने दिल्ली एनसीआर में जानलेवा प्रदूषण को गंभीरता से लिया है। एनएचआरसी ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि संबंधित प्राधिकारियों ने इस समस्या से निपटने के लिए वर्षभर उचित कदम नहीं उठाए जो क्षेत्र के निवासियों के जीवन एवं स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन के समान है।’’ पैनल ने कहा कि वह स्वास्थ्य सचिवों से उम्मीद करता है कि वे प्रदूषण से प्रभावित लोगों का उपचार करने के लिए सरकारी अस्पतालों एवं अन्य एजेंसियों की तैयारी और लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में जानकारी दें।

उसने कहा कि केंद्र और राज्यों में एजेंसियों द्वारा प्रभावशाली कदम उठाए जाने की तत्काल आवश्यकता है। पैनल ने कहा कि पर्यावरणीय कानूनों के उचित क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उसने कहा, ‘‘इस संबंध में विशेषज्ञों द्वारा उचित अध्ययन किए जाने और दीर्घकालीन एवं लघुकालीन कदमों समेत उनकी सिफारिशें के उचित क्रियान्वयन की आवश्यकता है। लोगों की एहतियातन मेडिकल जांच कराए जाने की भी आवश्यकता है।’’ एचएचआरसी ने कहा कि लगभग हर समाचार पत्र और टीवी चैनल इस विषय पर खबरें प्रसारित कर रहे हैं  शहर में जहरीली धुंध खासकर जब सर्दी का मौसम आने वाला होता है, तब आने वाली ‘एक वार्षिक स्वास्थ्य समस्या’ बन गई है।

उसने कहा कि इसमें दिल्ली-एनसीआर में और इसके आसपास चल रहे निर्माण कार्यों के साथ उड़ने वाले धूल के कण, वाहन, खासकर डीजल से चलने वाले ट्रक और भारी वाहन, पंजाब और हरियाणा में किसानों के पराली जलाने के कारण हुए प्रदूषण, मानवीय नियंत्रण के बाहर शांत हवा की स्थिति और अत्यधिक नमी समेत कई कारणों का जिक्र किया गया है। आयोग ने कहा कि शहर में भारी वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए और राजमार्गों को जोड़ने के लिए वैकल्पिक सड़कों के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई प्रभावशाली कदम नहीं उठाया गया।

प्रदूषण बुधवार को खतरनाक स्तर पर पहुंच गया और क्षेत्र में धुंध छाई रही जिसके कारण सरकार को रविवार तक स्कूलों को बंद करने, निर्माण गतिविधियां रोकने और शहर में ट्रकों के प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा करनी पड़ी। एनसीआर में गाजियाबाद और नोएडा सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) चेताने वाले स्तर पर पहुंच गया है। उसने कहा कि कुछ यंत्रों ने कुछ स्थानों पर 999 का अधिकतम एक्यूआई दर्ज किया। उसने यह भी कहा, ‘‘यह भी जिक्र किया गया कि दुनिया के सबसे प्रदूषित राजधानी शहर में वायु गुणवत्ता इस कदर खराब हो गई है कि यह एक दिन में कम से कम 50 सिगरेट पीने के समान है। एक समाचार वेबसाइट ने रिपोर्ट दी कि हालात इतने खराब हैं कि दिल्ली के कुछ हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक पर इसने 1000 का आंकड़ा छू लिया है।’’

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