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तेल निकाल रहा आम आदमी का ‘तेल’; पर NFHS, CES का कहना- गरीबों पर नहीं पड़ता है पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी का फर्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर लोग पेट्रोल और डीजल पर या तो खर्च ही नहीं करते या फिर थोड़ा बहुत ही खर्च करते हैं। डेटा कहता है कि तेल के दाम बढ़ने से गरीबों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

petrol price hikeसांकेतिक तस्वीर (फोटोः एजेंसी)

पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। आम आदमी इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है, लेकिन NFHS, CES का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी का फर्क गरीबों पर नहीं पड़ता है। सर्वे का कहना है कि मध्यम वर्गीय तबके पर भी इसका थोड़ा बहुत ही असर पड़ता है।

नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (NFHS) 2015-16 के मुताबिक, भारत में केवल 6% लोगों के पास ही कार या उससे बड़े वाहन हैं। 38% लोग दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करते हैं। 2011-12 के कंसप्शन एक्पेंडेचर सर्वे (CES) का हवाला देकर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर लोग पेट्रोल और डीजल पर या तो खर्च ही नहीं करते या फिर थोड़ा बहुत ही खर्च करते हैं। मंथली-पर कैपिटा एक्पेंडेचर का आंकड़ा बताता है कि पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च केवल 2.4% है। डेटा कहता है कि तेल के दाम बढ़ने से गरीबों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खपत का आंकड़ा कभी भी indirect tax burden की सही तस्वीर नहीं दिखाता है। जनवरी 2014 के Nielsen सर्वे के मुताबिक, तेल की सबसे ज्यादा रिटेल सेल 16 राज्यों आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, एमपी, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, यूपी और बंगाल में होती है। 2019-20 के दौरान इन राज्यों में तेल की बिक्री देश की कुल खपत का 88% रही।

सर्वे कहता है कि इसमें 60% पेट्रोल दोपहिया वाहनों ने इस्तेमाल किया। थ्री व्हीलरों ने 1.5%, कार और यूटिलिटी व्हीकलों ने 37% पेट्रोल का इस्तेमाल किया। जबकि डीजल के मामले में इन वाहनों का यह आंकड़ा 28.5% रहा। कमर्शियल वाहनों ने इस दौरान सबसे ज्यादा डीजल का इस्तेमाल किया। यह आंकड़ा लगभग 37.8% रहा। कृषि से जुडे़ वाहनों की डीजल खपत का आंकड़ा इस बीच 13% रहा।

रिपोर्ट में एक उदाहरण के जरिए समझाया गया है कि अगर सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स से 100 रुपए कमाती है तब डेटा के हिसाब से कुल टैक्स का 60% दोपहिया वाहनों से एकत्रित किया गया जबकि कार मालिकों ने केवल 37% टैक्स दिया। डीजल की बात की जाए तो टैक्स के तौर पर मिलने वाले 100 रुपए में से 13 रुपए कृषि वाहनों से आए। जबकि बढ़े हुए टैक्स का 38% हिस्सा कमर्शियल वाहनों के जरिए सरकार के पास आया। रिपोर्ट कहती है कि आमदनी का यह हिस्सा उन गरीबों तक पहुंच जाता है जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। तेल के दाम बढ़ने से सामान महंगे होते हैं तब भी गरीब वर्ग को सरकार इसी आमदनी से राहत प्रदान करती है।

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