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जंगल में घर बनवाने के लिए डीजीपी ने कटवा दिए थे 25 पेड़, लगा 46 लाख रुपये का जुर्माना

कोर्ट ने कहा कि पहले के फैसलों में यह साबित हो चुका है कि बीएस सिद्धू ने 25 साल के पेड़ों को रिजर्व फोरेस्ट एरिया में अवैध रुप से काटा। इसके साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त भी अवैध रुप से की गई थी।

एनजीटी ने फॉक्सवैगन पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। (Express photo)

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने उत्तराखंड के एक पूर्व डीजीपी के खिलाफ 46 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है। दरअसल पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धु पर आरोप है कि उन्होंने मसूरी के रिजर्व फोरेस्ट डिवीजन में अवैध रुप से 25 पेड़ों की कटाई करायी। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के जस्टिस आरएस राठौड़ की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि यह बिल्कुल साफ है कि बीएस सिद्धू ने जानबूझकर रिजर्व फोरेस्ट एरिया में जमीन खरीदी और फिर उस जमीन पर घर बनवाने के लिए 25 पेड़ों की अवैध रुप से कटाई करायी।

ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि पूर्व डीजीपी की इच्छा थी कि जंगलों में उनका घर हो और इसके लिए उन्होंने रिजर्व फोरेस्ट की जमीन को चुना। इस पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है। हर गलती का एक जुर्माना होता है और यह समाज के हित में भी है। कोर्ट ने कहा कि पहले के फैसलों में यह साबित हो चुका है कि बीएस सिद्धू ने 25 साल के पेड़ों को रिजर्व फोरेस्ट एरिया में अवैध रुप से काटा। इसके साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त भी अवैध रुप से की गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस बात का ध्यान रखते हुए कि बीएस सिद्धू घटना के वक्त उत्तराखंड के डीजीपी थे, इसलिए उन्हें काटे गए पेड़ों की कीमत का 10 गुना जुर्माना लगाया गया है।

बता दें कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने यह फैसला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई एक याचिका पर दिया है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा धोखाधड़ी से रिजर्व फोरेस्ट एरिया में जमीन खरीदी गई और फिर वहां 25 पेड़ों की अवैध रुप से कटाई भी करायी गई। उल्लेखनीय है कि पेड़ों की अवैध कटाई और रिजर्व फोरेस्ट एरिया में जमीन की खरीद को नेशनल फोरेस्ट पॉलिसी, 1988 और फोरेस्ट एक्ट, 1980 के तहत गैरकानूनी ठहराया गया है।

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