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उत्तराखंड-हिमाचल को एनजीटी का नोटिस, कहा- जंगलों की आग को हल्के में लिया जा रहा है

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले पीठ ने पर्यावरण और वन मंत्रालय से पूछा कि उसने हालात पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

bio diversity, Uttarakhand, Uttarakhand Forest, Uttarakhand Forest fireउत्तराखंड के श्रीनगर के जंगल में लगी आग। (PTI Photo)

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के जंगलों में लगी आग के मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मंगलवार को कहा कि वह यह देखकर स्तब्ध है कि हर कोई मुद्दे को इतने हल्के तरीके से ले रहा है। एनजीटी ने दोनों राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी किया।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाले पीठ ने पर्यावरण और वन मंत्रालय से पूछा कि उसने हालात पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। पीठ ने कहा, ‘आपने (पर्यावरण और वन मंत्रालय ने) आग की बाबत क्या किया है? यह हमें चौंका रहा है। हर कोई इसे इतने हल्के में ले रहा है।’

इस सवाल के जवाब में मंत्रालय के वकील ने कहा कि संबंधित अधिकारियों की पूरी टीम इस मुद्दे पर काम कर रही है। भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों को भी आग बुझाने के अभियान में लगाया गया है।

इस पर पीठ ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सरकारों से पूछा, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आपने क्या तैयारियां की हैं? बहरहाल, पीठ ने इस मुद्दे पर दोनों राज्य सरकारों के वकीलों को निर्देश लेने को कहा। पीठ ने हिदायत दी कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सरकारों को जंगलों में लगी आग के संदर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएं। एनजीटी ने कहा कि संबंधित

सचिव 10 मई को सुनवाई की अगली तारीख पर इस बाबत अपना हलफनामा दाखिल करेंगे। पीठ ने उन्हें यह भी बताने को कहा है कि आग लगने की घटना से पहले उनकी ओर से कैसे एहतियाती कदम उठाए गए थे। वन प्रबंधन को लेकर उनकी क्या योजनाएं हैं। एनजीटी ने कहा, ‘हम आग लगने के कारणों के बारे में जानना चाहते हैं।’ एनजीटी ने एक एनजीओ की ओर से दाखिल अर्जी पर बहस की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

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