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जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन पर एनजीटी ने लगाया 100 करोड़ का जुर्माना

जांच में सामने आया कि फॉक्सबैगन कंपनी की ओर से गाड़ियों में फिट की गई नई डिवाइस महज एक सॉफ्टवेयर था, जो डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन के आंकड़ों में हेर-फेर कर देता था।

Author November 17, 2018 10:52 AM
एनजीटी ने फॉक्सवैगन पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। (Express photo)

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शुक्रवार (16 नवंबर) को जर्मन कार कंपनी फॉक्सवैगन को 100 करोड़ रुपये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जमा कराने का आदेश दिया है। कंपनी पर आरोप था कि उसने भारत में डीजल गाड़ियों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए ऐसे उपकरण का इस्तेमाल किया जो वास्तविक आंकड़े में फेरबदल कर देता था। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बेंच ने फॉक्सवैगन की गाड़ियों से पर्यावरण को हुए नुकसान का वास्तविक आंकलन करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में पर्यावरण मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, सीपीसीबी और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अधिकारी शामिल होंगे।

एनजीटी ने इस कमेटी से एक महीने के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने फॉक्सवैगन और मामले में याचिकाकर्ता को भी कमेटी के सामने एक सप्ताह के अंदर पेश होने को कहा है। बता दें कि सलोनी अलवाडी नाम की एक स्कूल शिक्षिका समेत कुछ लोगों ने याचिका दायर कर ट्रिब्यूनल से अनुरोध किया था कि पर्यावरण नुकसान को देखते हुए देश में इस कंपनी की कार की बिक्री पर रोक लगाई जाए। कार निर्माता कंपनी ने एनजीटी को अपने जवाब में कहा था कि वह 3.23 लाख वाहनों को भारतीय बाजार से वापस लेकर उनमें ऐसी डिवाइस लगाएगी, जो कार्बन का उत्सर्जन कम कर देगी।

बता दें कि जांच में सामने आया कि फॉक्सबैगन कंपनी की ओर से गाड़ियों में फिट की गई नई डिवाइस महज एक सॉफ्टवेयर था, जो डीजल वाहनों में कार्बन उत्सर्जन के आंकड़ों में हेर-फेर कर देता था। फॉक्सवैगन ने सितंबर 2015 में पहली बार कबूला था कि उसने 2008 से 2015 के बीच दुनियाभर में बेची गई 1.11 करोड़ गाड़ियों में ‘डिफीट डिवाइस’ लगाई थी।  उस समय खबरें आई थीं कि कंपनी की ई189 डीजल इंजन में एक ऐसी डिवाइस लगी होती है जो उत्सर्जन परीक्षण के दौरान प्रदूषण स्तर को कम करके दिखाता है लेकिन परीक्षण में यह बात सामने आई थी कि वाहनों में अतिरिक्त नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन के स्तर का कारण बन रहा है। कंपनी ने माना था कि उसने इस डिवाइस के साथ पूरी दुनिया में 1 करोड़ से ज्यादा गांड़ियां बेची हैं और अकेले अमेरिका में उस पर 18 बिलियन डॉलर का जुर्माना लगा था।

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