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BPCL समेत 4 कंपनियों पर NGT का हंटर! ‘गैस चैम्बर जैसे हालात’ पैदा करने पर 286.2 करोड़ की ‘पेनाल्टी’

एनजीटी ने एचपीसीएल को 76.5 करोड़ रुपए, बीपीसीएल को 67.5 करोड़ रुपए, एजिस को 142 करोड़ रुपए और एसएलसीएल को 0.2 करोड़ रुपए भुगतान करने का आदेश दिया।

Author नयी दिल्ली | August 14, 2020 6:00 PM
Air Pollution, Gas Chamber like Situation, Gas Chamber Situationशहर में मकानों के किनारे धू-धूकर जलता कूड़ा और उससे फैलता हुआ वायु प्रदूषण। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बीपीसीएल और एचपीसीएल समेत चार कंपनियों को मुंबई के माहुल, अम्बापाड़ा और चेम्बूर जैसे इलाकों में ‘‘गैस चैम्बर जैसी स्थिति’’ पैदा करने के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें पर्यावरण को हुए नुकसान के कारण 286.2 करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया।

एनजीटी ने कहा कि वातावरण में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) की मौजूदगी के पीछे, वाहनों से उत्सर्जन समेत कई और कारण भी हो सकते हैं, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सी लॉर्ड कन्टेनरर्स लिमिटेड (एसएलसीएल), एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड (एएलएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) माहुल और अम्बापाड़ा गांवों में वीओसी की मौजूदगी के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

मुंबई निवासी चारुदत्त कोली ने मुंबई के माहुल, अम्बापाड़ा और चेम्बूर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए खासकर कंपनियों द्वारा कदम उठाए जाने का अनुरोध करते हुए याचिका दायर की थी।

अधिकरण ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘हानिकारण वायु प्रदूषकों के लंबे समय पर संपर्क में रहने से फेफड़े और अन्य अंग कमजोर हो सकते हैं। इलाके में जो स्थिति है, वह कभी-कभी ‘गैस चैम्बर’ की तरह हो जाती है।’’

एनजीटी ने एचपीसीएल को 76.5 करोड़ रुपए, बीपीसीएल को 67.5 करोड़ रुपए, एजिस को 142 करोड़ रुपए और एसएलसीएल को 0.2 करोड़ रुपए भुगतान करने का आदेश दिया।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि 10 सदस्यीय संयुक्त समिति बहाली कदमों के लिए कार्य योजना तैयार करेगी। सीपीसीबी के दो वरिष्ठ सदस्य, पर्यावरण मंत्रालय, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला दंडाधिकारी, नीरी, टीआईएसएस मुंबई, आईआईटी मुंबई, केईएम अस्पताल मुंबई के प्रतिनिधि और महाराष्ट्र के स्वास्थ्य सचिव की ओर से एक व्यक्ति इस समिति में शामिल होंगे।

उसने कहा कि इस मामले में राज्य पीसीबी नोडल एजेंसी होगा। संयुक्त समिति इस कार्य में किसी भी अन्य विशेषज्ञ/संस्था की मदद लेने के लिए स्वतंत्र होगी।

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