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अगली दिवाली पर दिल्ली में नहीं दिखेगा इतना प्रदूषण और शोर

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर काफी चिंतित है इसलिए अब वह कुछ उपायों को शुरू करने पर विचार कर रही है जिससे इनका स्तर नीचे लाया जा सके।

Author नई दिल्ली | November 11, 2015 9:55 AM
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर काफी चिंतित है इसलिए अब वह कुछ उपायों को शुरू करने पर विचार कर रही है जिससे इनका स्तर नीचे लाया जा सके। (फोटो: मनोज कुमार)

अगर आप सरकार के पर्यावरण विभाग का काम सुचारू रूप से हुआ, तो दिल्ली अगले साल शोर और प्रदूषण फ्री दिवाली सेलिब्रेट करेगी। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग वायु और ध्वनि प्रदूषण के स्तर को नीचे लाने के लिए कुछ उपायों को शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। इनमें पटाखों के निर्माण में कुछ धातुओं के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय शामिल हैं।

‘पटाखों को विनियमित करने के लिए मानदंडों पर दोबारा गौर करने की आवश्यकता है। पटाखों में शोर – स्तर के लिए कट-ऑफ 145 डेसीबल है, जो बहुत ही ज्यादा है। पर्यावरण सचिव अश्विनी कुमार का कहना है कि ‘मौजूदा नियमों के तहत, पटाखें शोर के मामले में काफी घातक साबित हो सकते है, जिसे नीचे लाना बेहद ज़रूरी है।’

अश्विनी कुमार ने कहा ‘पटाखों की खरीद पर प्रतिबंध लगाने के बजाय, अधिकारी अब इनके निर्माण और आपूर्ति पर ध्यान देंगे जिससे प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकेगा।’ कुमार ने कहा दिल्ली सरकार को पश्चिम बंगाल की अधिनियमित मानदंड ज़रूर आकर्षित करेगी।

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एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि ‘पश्चिम बंगाल रास्ता दिखा दिया है । वे 90 डेसीबल तक पटाखों के होने वाले शोर और प्रदुषण का स्तर कम कर दिया है।’ पर्यावरण विभाग और भी अन्य उपायों पर विचार कर रहा है जैसे रंगीन आतिशबाजी के निर्माण में तांबा, बेरियम और स्ट्रोंटियम जैसी धातुओं के उपयोग को कम करना, क्योंकि इससे प्रदुषण ज्यादा होते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि ‘पोटेशियम क्लोरेट, जो आमतौर पर चीनी पटाखों में इस्तेमाल किया जाता है, यह ना सिर्फ अत्यधिक प्रदूषण करता है बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज़ से भी अधिक खतरनाक है।’

पर्यावरण विभाग के अनुसार, पटाखों में ऐसी धातुओं का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए अगर वह इन्हें बैन नहीं कर सकता।

अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण विभाग आवश्यक परिवर्तन को लाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और अन्य सरकारी विभागों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

कुमार ने आगे कहा कि “कानूनी ढांचा उपलब्ध है। राज्य सरकार ने दो अधिनियमों के तहत नियम या निर्देश फ्रेम कर सकते हैं – पर्यावरण (संरक्षण ) अधिनियम और वायु ( प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, ” उन्होंने कहा कि पर्यावरण विभाग एक महीने में इस प्रक्रिया को पूरा करने में सक्षम होगी।

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