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कहां हैं दीप सिद्धू और लखा सिधाना? दबाव बनाने को किसानों पर हुई FIR- एंकर ने दागा सवाल तो नाराज हुईं भाजपा प्रवक्ता

न्यूज 24 पर एंकर ने बीजेपी प्रवक्ता से पूछा कि दीप सिद्धू और लखा सिधाना कहां है? इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता अपराजिता सारंगी ने कहा कि पीएम मोदी और बीजेपी की नीयत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा न करें।

Farmers Protest, Delhi Policeगणतंत्र दिवस के दिन किसानों ने जमकर हंगामा किया था।

न्यूज 24 पर एंकर ने बीजेपी प्रवक्ता से पूछा कि दीप सिद्धू और लखा सिधाना कहां है? इसके जवाब में बीजेपी प्रवक्ता अपराजिता सारंगी ने कहा कि पीएम मोदी और बीजेपी की नीयत पर प्रश्नचिन्ह खड़ा न करें। देश का विपक्ष अपना गोलपोस्ट बदलता आ रहा है। विपक्ष अपनी जमीन खो चुका है। हर दिन उसे अपना गोलपोस्ट बदलना पड़ता है। विपक्ष बस अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है और बीजेपी का विरोध करना चाहता है। विपक्ष कभी नहीं चाहता था कि समस्या का समाधान हो। बीजेपी जब कहती थी कि आंदोलन से खालिस्तानी लोग जुड़े हुए हैं तो कांग्रेस वाले कहते थे कि किसानों को खालिस्तानी कह रहे हैं।

डिबेट में कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लाल किले की तरफ प्रदर्शनकारियों को जाने क्यों दिया गया? सरकार ने अभी तक दीप सिद्धू को गिरफ्तार नहीं किया? इस पर बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि 20 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाएगी। हम पहले से ही कहते आ रहे थे कि इस आंदोलन के पीछे कुछ राष्ट्र विरोधी ताकते काम कर रही हैं। विपक्ष किसानों को गुमराह करने का काम कर रहा था।

बता दें कि किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में दीप सिद्धू नाम के शख्स का नाम सामने आ रहा है। दीप सिद्धू प्रदर्शनकारियों के साथ लाल किले पर दिखा था। जहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर हंगामा किया। आरोप है कि उसी ने लाल किले की प्राचीर पर सिख धर्म का झंडा लहराया। इस घटना के बाद से देशभर में लोगों में भारी गुस्सा है। जो लोग किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रहे थे वे भी इस काम की निंदा कर रहे हैं।

हालांकि सिद्धू ने फेसबुक पर कहा है कि उसने राष्ट्रीय ध्वज को नहीं हटाया है बल्कि धर्म का निशान लगाया है। सिद्धू ने अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अपना विरोध जाहिर करने के लिए हमने ऐसा किया।

दीप सिद्धू ने पूरे घटना क्रम के लिए सरकार को ही कसूर वार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को नजरअंदाज कर रही थी। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद सरकारी संपत्ति को या किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था। कई किसान नेताओं ने हिंसा का ठीकरा सिद्धू के सिर फोड़ा है और खुद को इस हिंसा से अलग किया है।

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