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’10 प्याज खाने और 10 जूते खाने’ वाला होगा BJP का हाल- बोले SP नेता, संबित पात्रा का जवाब- ये टोंटी चोरों की बातें मानेंगे?

संबित पात्रा ने कहा, ''यहां कहा जा रहा है कि मोदी सरकार को जूते पड़ेंगे क्यों जूते पड़ेंगे। अब टोंटी चोरी करने वाले सरकार को जूता मारेंगे।''

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न्यूज 18 इंडिया पर डिबेट के दौरान समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने कहा, ”बीजेपी के साथ वो हाल होगा कि एक चोर जो कोतवाली में पकड़ कर लाया गया था। थानेदार ने कहा कि या तो 10 प्याज खा लो या 10 जूते लगवा लो। चोर ने कहा कि प्याज खा लूंगा। प्याज खाने लगा तो उसे बहुत कड़वी लगी। उसने कहा कि मैं जूते खा लूंगा तो उसे जूता मारा गया। तो उसने 10 प्याज भी खाए और 10 जूते भी खाए।” इस पर संबित पात्रा ने जवाब देते हुए कहा, ” यहां पीएम को, सरकार को जूते मारने की बात होगी। मोदी तू मर जा।” इस पर सपा प्रवक्ता ने कहा कि आपकी बात को घुमाने की बुरी आदत है। देश को बेवकूफ नहीं बना सकते।

संबित पात्रा ने कहा, ”यहां कहा जा रहा है कि मोदी सरकार को जूते पड़ेंगे क्यों जूते पड़ेंगे। समाजवादी पार्टी तो वैक्सीन भी नहीं लगवाएगी। सपा कह रही है कि ये बीजेपी की वैक्सीन है। जो समाजवादी पार्टी टोंटी चोरी करती है तो उस समाजवादी पार्टी की बात मानी जाएगाी। अब टोंटी चोरी करने वाले सरकार को जूता मारेंगे।”

संबित पात्रा ने कहा कि देश के छोटे किसानों के बारे में किसने सोचा, मिट्टी की सेहत का कार्ड किसने दिया। फसल बीमा योजना किसने दी। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को किसने लागू किया। आप जूता मारोगे तो जनता सरकार पर फूल बरसाएगी।

बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वे कृषि कानूनों पर रोक लगाएंगे। कोर्ट ने कहा कि स्थिति बदतर हो चुकी है। कोर्ट ने कहा,”हमें बताएं कि क्या आप कानूनों पर रोक लगाएंगे या फिर हम ऐसा करें? आपकी समस्या क्या है?” कोर्ट ने कृषि कानूनों और किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर कुछ गलत होता है तो हर कोई जिम्मेदार होगा। हम अपने हाथों को लोगों के खून से नहीं रंगना चाहते।” शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगाई जाए।

कोर्ट ने कहा,”स्थिति बदतर हो गई है। लोगों ने आत्महत्याएं की हैं। इस मौसम में बूढ़े और महिलाएं आंदोलन का हिस्सा क्यों हैं?” अदालत ने केंद्र से एक समिति गठित करने का आग्रह भी किया।

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