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विहिप की कमान संभालते ही बोले नए अध्‍यक्ष- विघटनकारी ताकतें दे रहीं कठुआ मामले को सांप्रदायिक रंग

विहिप अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, "अदालती फैसलों के खिलाफ जन आंदोलन नहीं किया जाना चाहिए। अदालत के फैसलों को न्यायिक और संवैधानिक तरीके से ही चुनौती दी जानी चाहिए।"

Author इंदौर | April 16, 2018 8:48 PM
विहिप के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वी एस कोकजे। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सामूहिष्क बलात्कार के बाद आठ वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले को विष्श्व हिंदू परिषद (विहिप) के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वी एस कोकजे ने सोमवार को शर्मनाक बताया। इसके साथ ही, कहा कि विघटनकारी ताकतें इस मामले को सांप्रदायिक रंग दे रही हैं। विहिप अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गृह नगर पहुंचे कोकजे ने स्थानीय हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, “संस्कारों के बड़े केंद्र रहे देश में इस तरह की घटना (कठुआ काण्ड) सामने आना शर्मनाक है। हम इस घटना की घोर निंदा करते हैं। बलात्कार का दुष्कृत्य मानव अधिकारों के ष्खिलाफ है।” उन्होंने कहा, “जिस तरह हम कहते हैं कि आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता, उसी तरह बलात्कार के मामलों में आरोपी और पीड़िता का धर्म क्यों देखा जाना चाहिए।” कोकजे ने कहा, “कठुआ काण्ड को लेकर जो लोग सांप्रदायिक बातें कर रहे हैं, वे समाज को विघटित करने वाली ताकतों से जुड़े हैं। इन लोगों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।”

उन्होंने एक सवाल पर कहा कि विहिप का मत है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में किसी बदलाव की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है और इसके प्रावधानों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश और राजस्थान के उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश ने इसी संदर्भ में कहा, “निर्दोष लोगों को सताया नहीं जाना चाहिए। लेकिन दोषियों को बख्शा भी नहीं जाना चाहिए।” क्या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के वास्तविक प्रावधानों को बहाल करने के लिए सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए, इस सवाल पर कोकजे ने सीधा जवाब टालते हुए कहा, “मामले में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के संबंधित फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की है। याचिका पर अदालत का निर्णय आने के बाद सरकार को ही तय करना है कि उसे इस विषय में आगे क्या करना है।” दलित संगठनों ने उच्चतम न्यायालय के 20 मार्च के फैसले के जरिये इस कानून को कथित तौर पर हल्का किये जाने के खिलाफ दो अप्रैल को भारत बंद बुलाया था। इस दौरान अलग-अलग ंिहसक घटनाओं में कई लोग मारे गए थे।

विहिप अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने जोर देकर कहा, “अदालती फैसलों के खिलाफ जन आंदोलन नहीं किया जाना चाहिए। अदालत के फैसलों को न्यायिक और संवैधानिक तरीके से ही चुनौती दी जानी चाहिए।” उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय के दलितों और सवर्णों के बीच हिंसक संघर्षों की घटनाओं को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। इन घटनाओं में शामिल लोगों का पता लगाकर उन्हें कठोर दंड दिया जाना चाहिए। विहिप के नवनिर्वाचित अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने एक सवाल पर कहा, “न तो हमारे कार्यक्रम बदले हैं, न ही कार्यपद्धति बदली है। हमारे केवल पदाधिकारी बदले हैं। अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मुद्दा अब भी हमारी प्राथमिकता में है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में जल्द ही अदालती निर्णय होगा।”

हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल ने कहा, “सामाजिक समरसता भी हमारे प्रमुख विषयों में शामिल है। हम नहीं चाहते कि हिन्दू समुदाय का कोई भी वर्ग पिछड़ा रहे। हम अपने समुदाय को संगठित कर विघटनकारी शक्तियों को परास्त करेंगे।” समान नागरिक संहिता के बारे में विहिप का मौजूदा रुख पूछे जाने पर कोकजे ने कहा, “समान नागरिक संहिता का विषय संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत आता है। ये सिद्धांत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तो तय नहीं किए थे। लिहाजा जब हम आग्रह करते हैं कि इन सिद्धांतों के आधार पर देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए, तो कुछ लोगों को तकलीफ क्यों होती है।”

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