Maharashtra News: महाराष्ट्र ने राज्य भर के सभी सरकारी दफ्तरों को निर्देश दिया है कि वे हर महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को चुने हुए प्रतिनिधियों (विधायक या सांसदों) के साथ मीटिंग के लिए दो घंटे का समय तय करें। साथ ही, यह भी निर्देश दिया है कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन लोगों के साथ जिन्हें किसी मामले में दोषी ठहराया गया है।
मौजूदा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने वाले ये निर्देश तब जारी किए गए जब विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पहले के निर्देशों के ठीक से लागू न होने पर नाराजगी जताई। निर्देशों के तहत, अधिकारियों को विधायकों और सांसदों के पत्रों का जवाब दो महीने के अंदर देना चाहिए और उनके साथ व्यवहार करते समय तय प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
सर्कुलर में क्या-क्या बताया गया?
सर्कुलर में यह भी बताया गया है कि अधिकारियों को कब विधायकों और सांसदों के स्वागत में खड़ा होना चाहिए और कब उनके साथ आम नागरिकों जैसा व्यवहार करना चाहिए। जब कोई विधायक या सांसद किसी सरकारी दफ्तर में जाता है, तो निर्देश में कहा गया है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके साथ सम्मान और शिष्टाचार से पेश आना चाहिए, उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए और सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के अधीन रहते हुए तुरंत मदद करनी चाहिए।
सर्कुलर में कहा गया है कि अधिकारियों को किसी ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि के सामने खड़े होकर अभिवादन करने की जरूरत नहीं है जिसे किसी आपराधिक या अन्य मामले में दोषी ठहराया गया हो, जिसे अपीलकर्ता या पक्षकार के रूप में किसी जांच या सुनवाई के लिए बुलाया गया हो या जो नामांकन दाखिल करने, जांच या सुनवाई सहित चुनाव कार्य के लिए किसी सरकारी दफ्तर का दौरा कर रहा हो।
जन प्रतिनिधियों के साथ आम नागरिकों की तरह व्यवहार करें
सर्कुलर में कहा गया है, “ऐसे अवसरों पर, संबंधित अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे कानून, नियमों और परिस्थितियों के अनुसार, बिना किसी भेदभाव के, जन प्रतिनिधियों के साथ आम नागरिकों की तरह व्यवहार करें।”
सरकार ने क्षेत्रीय विभाग प्रमुखों और दफ्तर प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे नियमित मुलाकात के समय के अलावा, हर महीने के पहले और तीसरे गुरुवार को चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग और उनके काम से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए दो घंटे का समय तय करें और इसकी सार्वजनिक घोषणा करें।
ये संशोधित निर्देश विधानसभा की विशेषाधिकार समिति द्वारा 1 सितंबर की बैठक में जन-प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार से जुड़े पहले के निर्देशों को सख्ती से लागू न करने पर जताई गई कड़ी नाराजगी के बाद जारी किए गए हैं। सरकार ने भूमि पूजन और उद्घाटन जैसे आधिकारिक समारोहों के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल को दोहराया है। जब किसी जिले में ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, तो केंद्रीय और राज्य मंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना अनिवार्य है।
इस लिस्ट में विधायक, सांसद, मेयर, जिला परिषद और नगर परिषदों के अध्यक्ष और सरपंच शामिल हैं। सर्कुलर में कहा गया है कि उनके बैठने की व्यवस्था सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार सख्ती से की जानी चाहिए।
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महाराष्ट्र में सोमवार को एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंद्रे को फोन किया। बोंद्रे पश्चिमी विदर्भ के बुलढाणा जिले की चिखली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले थे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
