अहमदाबाद में नए गांधी आश्रम का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। आश्रम परिसर में बनने वाले 23 संग्रहालयों (Museums) को डिजाइन करने का ठेका म्यूजियम स्टूडियो (Museum Studio) को दिया गया है। यह कंपनी सांस्कृतिक संस्थानों के लिए बड़े प्रोजेक्ट तैयार करने वाली जानी-मानी वैश्विक कंपनी है।

पेरिस मुख्यालय वाली म्यूजियम स्टूडियो की 46 देशों में मौजूदगी है। द इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि कंपनी इस प्रोजेक्ट पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी इकोफर्स्ट सर्विसेज लिमिटेड के साथ मिलकर काम करेगी।

महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट इस पूरे प्रोजेक्ट की देखरेख कर रहा है। इसके तहत ऐतिहासिक साबरमती आश्रम का पुनर्विकास, संरक्षण और विस्तार किया जाएगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी निगरानी में आगे बढ़ रही है।

गांधी जी ने साबरमती नदी के किनारे 60 एकड़ जमीन खरीदी थी। यह जमीन केंद्रीय जेल और श्मशान घाट के बीच स्थित थी। 1917 में गांधी जी इस आश्रम में रहने आ गए थे। इसी साल गांधी जी ने बिहार के चंपारण से अपना पहला बड़ा सत्याग्रह शुरू किया था।

इन इमारतों को 100 साल से भी ज्यादा पुराने समय में इस्तेमाल की गई उन्हीं सामग्रियों से फिर से तैयार किया जा रहा है। इनमें ईंट, सागौन की लकड़ी और चूने का प्लास्टर शामिल है। इन्हें जोड़ने के लिए उड़द का पेस्ट (black gram), गुड़ और मेथी के बीज से तैयार मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पुरानी इमारतों को नए 55 एकड़ में फैले परिसर में संग्रहालयों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यह विश्वस्तरीय स्मारक दुनिया में गांधी जी को समर्पित सबसे बड़ा स्मारक होगा।

संग्रहालयों में महात्मा गांधी के जीवन और आजादी के आंदोलन में उनके नेतृत्व से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को दिखाया जाएगा। इसके लिए ट्रस्ट की ओर से बनाई गई 9 सदस्यीय कंटेंट एडवाइजरी कमेटी (CAC) सुझाव दे रही है।

कमेटी में कौन-कौन लोग शामिल?

इस कमेटी में राजनेता, समाजसेवी, संग्रहालय विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हैं। समिति के सदस्यों में शामिल हैं। जिसमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, गुजरात विद्यापीठ की ट्रस्टी और गांधी जी के करीबी सहयोगी घनश्यामदास बिड़ला की पोती की बहू राजश्री बिड़ला, पटना के बिहार म्यूजियम के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और गुजरात बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता किशोर मकवाना, गुजरात विद्यापीठ के कुलपति और गुजरात बीजेपी के पूर्व मीडिया संयोजक हर्षद पटेल, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय के महानिदेशक सब्यसाची मुखर्जी, इतिहासकार और नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय सोसायटी के सदस्य रिजवान कादरी, नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के ट्रस्टी राजाराम याज्ञिक, नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज की प्रो-वाइस चांसलर मानवी सेठ का नाम है।

कमेटी का गठन मार्च में हुआ था और तब से अब तक उसकी तीन मीटिंग हो चुकी हैं। अगस्त में हुई आखिरी बैठक में संग्रहालय में प्रदर्शित किए जाने वाले कुछ कंटेंट की समीक्षा की गई। इसमें दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के बिताए वर्षों, उन्हें प्रभावित करने वाले लोगों और गांधी जी से प्रभावित होने वाले लोगों से जुड़ी सामग्री शामिल थी।

एक सूत्र ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कमेटी का काम सामग्री, डिजाइन और संग्रहालय से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच के बाद उन्हें मंजूरी देना है। CAC की मंजूरी के बाद ही डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

सूत्र ने बताया कि कमेटी के एक सदस्य ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग स्थित सत्याग्रह हाउस का दौरा किया और वहां सुरक्षित गांधी जी के लेखन पर 60 पन्नों का सुझाव दिया। सत्याग्रह हाउस को जर्मन वास्तुकार हरमन कैलनबाख ने डिजाइन किया था। गांधी जी 1908-09 में यहां रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, कमेटी फिलहाल इकोफर्स्ट की ओर से पेश किए गए शुरुआती प्लान की समीक्षा कर रही है, ताकि उसकी सामग्री और प्रस्तुति में प्रामाणिकता बनी रहे। कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद यह सामग्री नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) को भेजी जाएगी।

एक अधिकारी के मुताबिक, NID यह तय करेगा कि नई पीढ़ी, जिसकी पढ़ने में रुचि कम होती जा रही है, उसे गांधी जी की कहानी किस सबसे प्रभावी तरीके से बताई जाए। संग्रहालय में इस्तेमाल होने वाली सभी तरह की सामग्री और कम्युनिकेशन फॉर्मेट को अंत में PMMLS और IIH की ओर से भी जांचा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने संग्रहालयों में डिजिटल माध्यम से दिखाई जाने वाली सामग्री की सीमा 30 फीसदी तय की है। जहां इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले और इस तरह के उपकरण लगाए जाएंगे, वहां एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था होगी।

ट्रस्ट ने मूल गांधी आश्रम परिसर का हिस्सा रही 28 इमारतों के संरक्षण और बहाली के लिए टेंडर जारी किए थे। इनमें हॉस्टल, गौशाला, स्कूल, चरखा और बुनाई केंद्र, कागज बनाने का केंद्र और क्रेच जैसी इमारतें शामिल हैं। इकोफर्स्ट को 23 इमारतों में संग्रहालय और प्रदर्शनियां डिजाइन करने और विकसित करने के लिए 113 करोड़ रुपये का ठेका मिला है। आश्रम की गौशाला में बनने वाले संग्रहालय की इमारत का संरक्षण नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड कर रहा है।

साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना को केंद्र और गुजरात सरकार मिलकर लागू कर रहे हैं। शहरी योजनाकार (Urban Planner) बिमल पटेल की कंपनी HCP Design, Planning and Management Pvt Ltd ने इसका मास्टरप्लान तैयार किया है और सिविल निर्माण का काम भी किया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल महात्मा गांधी साबरमती आश्रम मेमोरियल ट्रस्ट की गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता करते हैं। ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के प्रमुख रिटायर्ड आईएएस अधिकारी आईपी गौतम हैं।

प्रोजेक्ट से जुड़े एक सोर्स ने जानकारी दी है कि अगर गांधी जी के देश और दुनिया के लिए योगदान को देखा जाए तो इसका 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इसी आश्रम से जुड़ा है। जिसमें चंपारण सत्याग्रह से लेकर भारत से अंग्रेजों के जाने तक।

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