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जनतंत्र की नई फिजा

नई संवैधानिक हैसियत ने जम्मू-कश्मीर को नई शिनाख्त दी है।

नई संवैधानिक हैसियत ने जम्मू-कश्मीर को नई शिनाख्त दी है। इसकी बड़ी मिसाल है जम्मू-कश्मीर में 2020 में पहली बार जिला विकास परिषद (डीडीसी) का हुआ चुनाव। दरअसल, पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद राज्य में हुई यह पहली बड़ी राजनीतिक गतिविधि रही। आठ चरण में हुए चुनाव में 280 सीटों पर 51.42 फीसद मतदान हुआ। इस चुनाव को लोगों ने वहां राजनीतिक दलों की ताकत के तौर पर ज्यादा देखा, जबकि इससे यह बात ज्यादा समझ में आती है कि संवैधानिक और लोकतांत्रिक आस्था के लिहाज से इस सूबे का नागरिक समाज किस तरह अपनी जिम्मेदारी का परिचय दे रहा है, अपने और अपने समाज के भविष्य के लिए फैसले ले रहा है।

गौरतलब है कि केंद्र ने राज्य में 73वें संशोधन को जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह लागू कर दिया। यह पिछले ढाई दशक से भी लंबे समय से लंबित पड़ा था। इस तरह राज्य में तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू हो गई, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए अक्तूबर, 2020 को जम्मू-कश्मीर ने ‘जम्मू-कश्मीर पंचायती राज कानून, 1989’ को अपनाया।

अब जम्मू-कश्मीर में हर जिले में एक जिला विकास परिषद (डीडीसी) होगा, जिसका नगरपालिका क्षेत्रों को छोड़कर पूरे जिले पर अधिकार क्षेत्र होगा। हर डीडीसी में 14 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे। इस तरह, जम्मू-कश्मीर के 20 जिलों में 280 सीधे निर्वाचित सदस्य होंगे। हर डीडीसी में सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी खंड विकास परिषदों के अध्यक्ष और जिले से विधान सभा के सदस्य (विधायक) शामिल होंगे। डीडीसी राज्य में पहले से रहे जिला विकास बोर्ड (डीडीबी) की जगह लेगा।

डीडीबी में, विकास कार्यों की योजना और निष्पादन ज्यादातर जिला विकास आयुक्तों द्वारा किया जाता था। डीडीसी का कार्यकाल पांच साल का होगा और चुनावी प्रक्रिया के तहत इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं को आरक्षण दिया जाएगा। जिले के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (या अतिरिक्त डीसी) जिला विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे।

डीडीसी को एक साल में कम से कम चार आम बैठकों का आयोजन करना होगा, जिसमें हर तिमाही में एक बैठक किया जाना शामिल होगा। डीडीसी के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए 14 निर्वाचन क्षेत्रों को सीमांकित किया गया है। इन निर्वाचन क्षेत्रों को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लिया गया है और निर्वाचित सदस्य बाद में खुद के बीच से डीडीसी के एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के 73वें संवैधानिक संशोधन को अपनाने के साथ इसने पंचायती राज संस्थानों के सभी तीन स्तरों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। इसमें पंचायत, खंड विकास परिषद और डीडीसी शामिल हैं। डीडीसी अपने अधिकार के तहत क्षेत्र के विकास कार्यक्रमों के तैयार के लिए जिम्मेदार होगा। वित्त, विकास, सार्वजनिक कार्यों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा और कल्याण के लिए पांच समितियों को गठित किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बयान में कहा है कि पंचायती राज्य संस्था के तृतीय श्रेणी का राज्य में लागू होना यहां पूरे 73वें संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन का प्रतीक है। सरकार का यह मानना है कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा पंचायती राज प्रणाली को दोषपूर्ण माना जाता था। लेकिन सरकार अब इसे राज्य में उपराज्यपाल प्रशासन के माध्यम से पुनर्जीवित कर रही है।

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में, डीडीसी प्रभावी रूप से यहां के 20 जिलों में जमीनी स्तर पर विकास के लिए प्रतिनिधि निकाय बन जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि इसके जरिए कुछ पूर्व विधायक भी सत्ता में आना चाहेंगे। इस बात की संभावना है कि प्रत्येक जिले से 14 निर्वाचित सदस्य अंतत: विधानसभा चुनाव में भाग लेंगे। ऐसे में यह इन लोगों की एक नई टीम को जन्म दे सकता है जो अंतत: विधायक के रूप में विधानसभा में प्रवेश करेंगे।

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