नई दिल्लीः मोदी सरकार को प. बंगाल के पूर्व सीएम ने दिया झटका, अवार्ड लेने से किया इन्कार, माकपा ने भी सराहा

उन्होंने कहा, “मैं पद्म भूषण सम्मान के बारे में कुछ नहीं जानता। मुझे किसी ने इसके बारे में नहीं बताया। अगर मुझे पद्म भूषण सम्मान दिया गया है तो मैं इसे अस्वीकार कर रहा हूं।

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प. बंगाल के पूर्व सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य।(एक्सप्रेस फोटो)

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मोदी सरकार को झटका देते हुए पद्म भूषण सम्मान को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं पद्म भूषण सम्मान के बारे में कुछ नहीं जानता। मुझे किसी ने इसके बारे में नहीं बताया। अगर मुझे पद्म भूषण सम्मान दिया गया है तो मैं इसे अस्वीकार कर रहा हूं। माकपा ने उनके इस फैसले का स्वागत करते हुए वयोवृद्ध नेता की शान में कसीदे पढ़े हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक माकपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी ऐसे सम्मानों में यकीन नहीं रखती है। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के दौरान पश्चिम बंगाल के एक और पूर्व सीएम ज्योति बसु को भारत रत्न देने की पेशकश की गई थी लेकिन पार्टी ने तब भी उसे लेने से इन्कार कर दिया था। उनका कहना है कि बुद्धदेव जी ने जो किया वो पार्टी लाइन पर है।

बुद्धदेव भट्टाचार्य मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य हैं। वो 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। वो जाधवपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। 24 सालों तक विधायक रहने के बाद वो अपनी ही सरकार के पूर्व मुख्य सचिव मनीष गुप्ता से चुनाव हारे। अपने ही विधानसभा क्षेत्र से हारने वाले वो पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री हैं। उनसे पहले प्रफुल चन्द्र सेन अपने ही निर्वाचन क्षेत्र से हारे थे।

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ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और हाल ही में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हुए भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को मंगलवार को मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई। सरकार ने लीक से हटकर फैसला करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद और माकपा नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य को पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की।

राजनीतिक हलकों में गुलाम नबी और बुद्धदेव को मिले सम्मान पर हैरत का माहौल है। ऐसा अमूमन पहले की सरकारों ने नहीं किया। विपक्ष के नेताओं को पद्म पुरस्कार देने की परंपरा ना के बराबर है। हालांकि, गुलाम नबी को लेकर पीएम मोदी पहले भी संसद में अपनी भावनाओं का इजहार आंसू बहाकर कर चुके हैं।

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