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नहीं रहे राजस्थान बीजेपी चीफ मदन लाल सैनी, अमित शाह की मर्जी के खिलाफ वसुंधरा राजे ने बनवाया था अध्यक्ष

सूबे के सीएम अशोक गहलोत ने इस बाबत ट्वीट कर दुख प्रकट किया।

Madan Lal Saini, Rajasthan BJP Chief, Rajasthan, Ashok Gehlot, Congress, AIIMS, State News, National News, Hindi Newsमदन लाल सैनी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः रोहित जैन पारस)

राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य मदन लाल सैनी नहीं रहे। वह 76 साल के थे। सोमवार (24 जून, 2019) को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उन्होंने अंतिम सांस ली। एक बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, वह कई दिनों से बीमार थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने उनके देहांत पर ट्वीट कर खेद प्रकट किया। पीएम ने लिखा, “सैनी जी, बीजेपी परिवार के लिए भारी क्षति हैं। राजस्थान में उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के काम किया। हम उनके स्वभाग और समाज के लिए किए गए प्रयासों की तारीफ करते हैं। उनके परिवार और चाहने वालों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं। ओम शांति।”

वहीं, गृह मंत्री ने लिखा, “भाजपा के वरिष्ठ नेता व राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री मदनलाल सैनी जी के निधन का दु:खद समाचार प्राप्त हुआ। संगठन के विभिन्न पदों पर रहे मदनलाल सैनी जी एक सच्चे जनसेवक थे जिनका पूरा जीवन पार्टी और समाज को समर्पित रहा। राजस्थान में भाजपा को मजबूत करने में उनका अहम योगदान रहा।”

सूबे के सीएम अशोक गहलोत ने इस बाबत ट्वीट कर दुख प्रकट किया। उन्होंने लिखा, “बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी जी के निधन के बारे में जानकर हैरान और दुखी हूं। मेरे संवेदना और प्रार्थना उनके परिवार के साथ है। भगवान उनके परिजन को इस कठिन घड़ी से निपटने की ताकत दे और उनकी (सैनी) आत्मा को शांति दे।”

कौन थे सैनी?: 13 अगस्त 1943 को जन्मे सैनी सक्रिय राजनीति में आने से पहले आरएसएस के स्वयंसेवक रहे। वह भारतीय मजदूर संघ और बीजेपी किसान मोर्चा में महामंत्री भी रहे, जबकि सरदार पटेल स्मारक में प्रदेश संयोजक की भूमिका निभाई। 2018 में उन्हें राजस्थान बीजेपी चीफ का जिम्मा सौंपा गया था। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह की मर्जी के खिलाफ उन्हें सीएम वसुंधरा राजे ने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी दिलाई थी। वह वसुंधरा के करीबी माने जाते थे और पिछड़ा वर्ग (माली) से ताल्लुक रखते थे।

हालांकि, चार दशक के राजनीतिक करियर में वह केवल एक ही बार चुनाव जीत सके। 2008 में सैनी विधानसभा चुनाव में चौथे पायदान पर रहे, जबकि दो बार संसदीय चुनाव में हार का सामना किया। सैनी को राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे बीजेपी यह तर्क देती थी कि वह मृदुभाषी और ईमानदार नेता हैं।

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