मिनिस्टर का मतलब स्टैंप न हो, मंत्री जानते ही नहीं कि समझौते बाहर से हो रहे- टिकैत का नए मंत्रिमंडल पर निशाना

इसी बीच, बीकेयू ने गुरुवार को ऐलान किया कि अगस्त से उत्तर प्रदेश में जिला-स्तरीय बैठकें शुरू कर देश में किसानों की समस्याओं और अन्य मुद्दों को रेखांकित करेगा।

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भारतीय किसान यूनियन (BKU) नेता राकेश टिकैत। (फोटोः पीटीआई)

किसान नेता और बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मोदी सरकार के नए मंत्रिमंडल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मिनिस्टर का मतलब स्टैंप (मुहर) भर नहीं होता है। आलम यह है कि मौजूदा सरकार में मंत्रीगण जानते ही नहीं है कि उनके वहां समझौते बाहर से हो रहे हैं। उन्हें इस बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है।

हिंदी चैनल न्यूज 24 से बातचीत में उन्होंने बताया, “लोगों की तनख्वाहें नहीं बढ़ीं। किसानों की फसल के दाम न बढ़े, पर महंगाई देश में बढ़ रही है। हम भी आम आदमी है। किसान, जो गांव में रहता है, वह भी आम आदमी है। हमने महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिससे सरकार सुनती है। रोष से जुड़ा संदेश जाता है।”

विपक्ष की भूमिका में किसानों के आ जाने से जुड़े सवाल पर टिकैत बोले- हम तो अपनी भूमिका में हैं। भई, जेब से तो हमारे जा रहा है पैसा। जिसकी जेब से पैसा जाएगा, वह आंदोलन करेगा। पर विपक्ष को भी करना चाहिए। विपक्ष बोल नहीं रहा…मतलब इतना नहीं डरना चाहिए। उसे सामने आना चाहिए। अब पता नहीं किसके कान सरकार ने दबा रखे हैं।

नए मंत्रिमंडल को लेकर टिकैत ने बताया, “अघोषित आपातकाल…कुछ भी कर दो, कोई कान फड़काता ही नहीं। सुनता ही नहीं। मंत्री बनने चाहिए, तो उन्हें पावर भी दे देनी चाहिए। मिनिस्टर का मतलब स्टैंप होना नहीं है। मंत्री के पास तो कुछ शक्तियां/अधिकार भी होते हैं। उन्हें मंत्रालय की पूरी पावर दें। यहां पर तो ऐसा है कि मंत्री को पता ही नहीं है कि समझौते बाहर से हो रहे हैं। उन्हें जानकारी ही नहीं है कि देश के साथ कि धोखा हो रहा है। मंत्री को पता ही नहीं और उनके मंत्रालय में बाहर के बाहर ही खेल हो गया। मंत्रियों के पास न तो ताकत है, न ही जानकारी। मंत्री तक दरकिनार कर दिए जाते हैं। ऐसा तो नहीं होना चाहिए।”

संसद घेराव पर अपनी रणनीति बताते हुए किसान नेता ने आगे बताया, “संसद सत्र शुरू होने पर हर रोज वहां 200 किसान गाड़ी से जाया करेंगे। सत्र खत्म होने पर शाम को लौट आएंगे। अगले दिन फिर वे जाएंगे। सरकार और पुलिस 200 को भी मना करेंगे? हम उन्हें बताकर जाएंगे और फिर वापस भी आएंगे।”

इसी बीच, बीकेयू ने गुरुवार को ऐलान किया कि अगस्त से उत्तर प्रदेश में जिला-स्तरीय बैठकें शुरू कर देश में किसानों की समस्याओं और अन्य मुद्दों को रेखांकित करेगा। यूनियन के मुताबिक, अभियान का केन्द्र योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले राज्य में बिजली की ऊंची दरों और गन्ना किसानों के लंबित बकाया राशि का मुद्दा होगा। बीकेयू नए कृषि कानूनों के खिलाफ नवंबर 2020 के बाद से दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले चल रहे आंदोलन में शामिल है।

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