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अरविंद केजरीवाल के धरने पर HC सख्त- किसी के दफ्तर पर कब्जा कर नहीं होता धरना, आपको किसने दी मंजूरी?

सीएम के धरने का आज (18 जून) आठवां दिन है। आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल को लेकर वह उप राज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर पर पिछले सोमवार (11 जून) को धरने पर बैठे थे।

Author Updated: June 18, 2018 4:19 PM
सीएम के धरने पर दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त लहजे में पूछा कि आपको वहां बैठने की मंजूरी किसने दी। (फाइल फोटो)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के धरने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। सोमवार को कोर्ट ने कहा है कि आप किसी के घर या दफ्तर में घुसकर धरना नहीं दे सकते। धरना इस तरह से नहीं किया जाता है। आपको आखिर वहां पर धरना करने की मंजूरी किसने दी?

कोर्ट में इससे पहले दिल्ली सरकार के वकील ने कहा था, “आईएएस अधिकारियों ने कबूला था कि वे मंत्रियों द्वारा आयोजित बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।” कोर्ट ने इसी पर जवाब दिया- असल बात है कि जो धरना आप कर रहे हैं, उसे करने के लिए आपको अनुमति किसने दी? वकील बोला कि यह निजी फैसला था। दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या उसके लिए अनुमति मिली थी।

आपको बता दें कि सीएम के धरने का आज (18 जून) आठवां दिन है। आईएएस अधिकारियों की कथित हड़ताल को लेकर वह उप राज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर पर पिछले सोमवार (11 जून) को धरने पर बैठे थे। सीएम का आरोप था कि केंद्र सरकार के इशारे पर अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिससे काफी काम प्रभावित हो रहा है।

केजरीवाल उसी कथित हड़ताल को खत्म कराने की मांग पर उप राज्यपाल अनिल बैजल के दफ्तर में धरने पर बैठे थे। इस दौरान उनके साथ तीन कबीना मंत्री- मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और गोपाल राय भी बैठे हैं, जिनमें से दो ने भूख हड़ताल का ऐलान किया था।

आईएएस अधिकारियों के संगठन ने रविवार को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया था कि वे अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं। हड़ताल की अफवाह सिर्फ और सिर्फ उन लोगों के खिलाफ झूठा प्रचार करने के लिए फैलाई गई।

आईएएस अधिकारियों के संगठन ने रविवार को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया था कि वे अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं। हड़ताल की अफवाह सिर्फ और सिर्फ उन लोगों के खिलाफ झूठा प्रचार करने के लिए फैलाई गई। वहीं, सीएम के साथ धरने पर सत्येंद्र जैन ने भूख हड़ताल का ऐलान किया था, जिन्हें रविवार रात लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया था।

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