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सीजीआई बने जस्टिस बोबडे, किसानों के लिए लड़ी थी लड़ाई, बाल ठाकरे की भी कर चुके हैं पैरवी!

न्यायपालिका में इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले जस्टिस शरद अरविंद बोबडे महाराष्ट्र के चौथे व्यक्ति हैं। सबसे पहले जस्टिस प्रह्लाद गजेंद्रगडकर साल 1964 में सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई के पद पर पहुंचे थे।

शपथग्रहण समारोह के (दाएं) दौरान सीजेआई बोबडे और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद। (फोटोःएएनआई)

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने सोमवार को देश के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई। वे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का स्थान लेंगे। न्यायपालिका में शीर्ष पद पर पहुंचने वाले वह महाराष्ट्र के चौथे व्यक्ति हैं। इससे पहले जस्टिस प्रह्लाद गजेंद्रगडकर 1964 से 1966 तक देश के सातवें चीफ जस्टिस रह चुके हैं।

जस्टिस मोहम्मद हिदायतुल्ला 1968 से 1970 तक देश के 11वें चीफ जस्टिस थे। वहीं 16वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ ने 1978 से 1985 तक अपनी सेवाएं दीं। पिछले दो साल में जस्टिस बोबडे सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक निर्णयों में शामिल रहे हैं।

इसमें इस साल 9 नवंबर को अयोध्या विवाद में दिया गया फैसला भी शामिल है। जस्टिस बोबडे नौ सदस्यों वाली सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने सर्वसम्मति से निजता के अधिकार के सांविधानिक रूप से मौलिक अधिकार से जुड़ा फैसला सुनाया था।

बोबडे उस तीन सदस्यों वाली पीठ का भी हिस्सा थे जिसने कहा था कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से व्यक्ति को मूलभूत सुविधाओं और सरकारी सब्सिडी से वंचित नहीं किया जा सकता है। एक ए़डवोकेट के रूप में जस्टिस बोबडे उच्च न्यायालयों में किसानों के कई मामलों की पैरवी की।

1970 और 80 के दशक में बोबडे को किसानों के हक के लिए लड़ने वाले के रूप में जाना जाता था। साल 1996 में जस्टिस बोबडे ने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे से  जुड़े एक मानहानि का मुकदमा भी लड़ा था। शिवसेना संस्थापक बाला साहेब, शिवसेना नेता संजय राउत के साथ कुछ समाचारपत्रों के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुंबई के शिवाजी पार्क में ठाकरे ने कहा कि उनसे किसी ने कहा कि एक जज ने उसके पक्ष में फैसला सुनाने के लिए 35 लाख रुपये की मांग की थी। हाईकोर्ट से सजा के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में बोबडे द्वारा पेश की गई दलीलों को सही ठहराया और मामले को खारिज कर दिया।

नागपुर में जन्मे बोबडे ने एसएफएस कॉलेज नागपुर से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद उन्होंने डॉ. अंबेडकर लॉ कॉलेज, नागपुर यूनिवर्सिटी से विधि की पढ़ाई की। उनके पिता अरविंद बोबडे राज्य के एडवोकेट जनरल रह चुके हैं। लॉ कॉलेज में बोबडे की क्लासमेट नीता जोग कहती हैं कि मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि कोई अपनी प्रतिबद्धता, समर्पण और कड़ी मेहनत से भारत के चीफ जस्टिस के पद पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जस्टिस बोबडे कई नए वकीलों के लिए एक प्रेरणा हैं।

 कॉलेज में जीते हैं कई टेनिस टूर्नामेंटः नागपुर हाईकोर्ट में बोबडे की टीम में रहे एडवोकेट आरपी जोशी बताते हैं कि बहुत कम लोगों को मालूम है कि बोबडे ने अपने कॉलेज के दिनों में कई टेनिस टूर्नामेंट जीते हैं। वह अपने कॉलेज के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी थे और अभी भी टेनिस के बड़े प्रशंसक हैं।

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