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इस नई ऐंटीबॉडी थेरपी से केवल 12 घंटे में ठीक हो गए कोरोना के मरीज़, साबित हो सकती है गेमचेंजर

कोरोना के इलाज में कारगर बताए जाने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल थेरेपी का इस्तेमाल अब भारत में भी शुरू हो गया है और इसके शुरुआती नतीजे राहत देने वाले आए हैं।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी से दो कोविड-19 मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार। (Twitter/Medanta)

देश में कोरोना का प्रकोप अब कुछ कम हो गया है। लेकिन अब भी रोजाना हजारों की संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इस वायरस को मात देने के लिए देश में अलग-अलग तरह के इलाज किए जा रहे हैं। कोरोना के इलाज में कारगर बताए जाने वाली मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल (MAC) थेरेपी का इस्तेमाल अब भारत में भी शुरू हो गया है और इसके शुरुआती नतीजे राहत देने वाले आए हैं।

गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने बुधवार को बताया कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी से 12 घंटे के भीतर कोविड-19 के दो मरीजों के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ। सर गंगाराम अस्पताल (एसजीआरएच) की चिकित्सा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डॉक्टर पूजा खोसला ने बताया कि 36 वर्षीय एक स्वास्थ्यकर्मी तेज बुखार, खांसी, मांसपेशी दर्द, बेहद कमजोरी और सफेद रक्त कण की कमी से पीड़ित थे। उन्हें मंगलवार को बीमारी के छठे दिन रेगसीओवी2, कासिरीविमाब और इम्डेविमाब दिया गया।

उन्होंने बताया कि इस तरह के लक्षण वाले मरीज मध्यम से नाजुक स्थिति में तेज़ी से पहुंच जाते हैं। इस मामले में पांच दिन तक मरीज को तेज बुखार रहा और सफेद रक्त कण स्तर 2,600 तक गिर गया था। इसके बाद उन्हें मोनोक्लोनल एंडीबॉडी थैरेपी दी गई, जिसके आठ घंटे बाद उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

मोनोक्लोनल एंटीबॉडिज, एंटीबॉडी की एक प्रति है, जो एक विशिष्ट एंटीजन को निशाना बनाती है। इस उपचार का इस्तेमाल पहले इबोला और एचआईवी में किया जा चुका है। वहीं, दूसरा मामला 80 वर्षीय मरीज आर के राजदान का है। वह मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे और वह तेज बुखार और खांसी के शिकार थे। अस्पताल ने एक बयान में बताया, ‘‘ सीटी स्कैन में हल्की बीमारी की पुष्टि हुई। उन्हें पांचवें दिन रेगसीओवी2 दिया गया। मरीज के स्वास्थ्य में 12 घंटे के भीतर सुधार हुआ।”

डॉक्टर खोसला ने कहा कि अगर उचित समय पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी का इस्तेमाल होता है, तो यह इलाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे ज्यादा खतरे का सामना कर रहे लोगों को अस्पताल में भर्ती करने या उनकी स्थिति को और खराब होने से बचाया जा सकता है। वहीं इससे स्टेरॉयड या इम्यूनोमॉड्यूलेशन के इस्तेमाल को कम किया जा सकता है और इससे बचा जा सकता है। इससे म्यूकरमाइकोसिस या कई तरह के अन्य संक्रमणों का खतरा कम हो जाता है।

वहीं बीएलके-मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने मंगलवार को बताया कि हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त दो कोविड-19 के मरीजों पर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी का इस्तेमाल किया गया, जिसके एक सप्ताह बाद उनकी रिपोर्ट ‘निगेटिव’ आई।
(भाषा इनपुट के साथ)

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