कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को ईरानी ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में मंजूर अहमद की मौत हो गई। वह अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए फ्लाइट में सवार होने वाले थे। मंजूर अहमद लगभग तीन दशकों से कुवैत में टेलर का काम कर रहे थे और मध्य प्रदेश में अपने परिवार की मदद के लिए पैसे भेजते थे।

उज्जैन जिले की राज रॉयल कॉलोनी के रहने वाले अहमद को बुधवार शाम कुवैत से मुंबई के लिए उड़ान भरनी थी और उसके बाद ट्रेन से आगे का सफर करना था। उनका परिवार महीनों बाद उनके घर लौटने पर उनका स्वागत करने की तैयारी कर रहा था।

कभी नहीं सोचा था कि वह हमारी आखिरी बातचीत होगी- मोहम्मद अनस

उनके बेटे मोहम्मद अनस ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उन्होंने मंगलवार शाम मुझे फोन किया और कहा कि वह जल्द ही घर पहुंच जाएंगे। उन्होंने मुझसे नागदा रेलवे स्टेशन पर उन्हें लेने आने के लिए कहा।” अनस ने कहा, “वह घर आने को लेकर बहुत खुश और उत्साहित थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह हमारी आखिरी बातचीत होगी।”

परिवार के सदस्यों के अनुसार, अहमद लगभग 30 सालों से कुवैत में रह और काम कर रहे थे, टेलर के तौर पर अपनी आजीविका कमा रहे थे और उज्जैन में अपनी पत्नी, बेटे, दो बेटियों और बुज़ुर्ग मां का भरण-पोषण कर रहे थे। परिवार ने बताया कि अहमद अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए लौटने वाले थे, जो 8 जून को रतलाम जिले में होनी थी। रिश्तेदार जश्न की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें अधिकारियों से उनकी मौत की खबर मिली।

अनस ने कहा कि उनके पिता ने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा विदेश में काम करते हुए बिताया। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमेशा परिवार की जरूरतों को अपनी जरूरतों से ऊपर रखा। आज हमारे पास जो कुछ भी है, वह उनकी कड़ी मेहनत की वजह से है। उन्होंने पैसे बचाए थे और शादी के लिए तोहफे भी खरीदे थे।”

उज्जैन में किया गया अंतिम संस्कार

परिवार के सदस्यों ने बताया कि अहमद पिछली बार अक्टूबर 2025 में घर आए थे। उस यात्रा के दौरान, उन्होंने भविष्य में और ज्यादा बार घर लौटने का वादा किया था। अनस ने बताया कि शुक्रवार को उज्जैन में उनके पिता का अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने कहा, “हमें कलेक्टर ने भरोसा दिलाया था कि अंतिम संस्कार में जो भी पैसा खर्च हुआ है, वह हमें वापस मिल जाएगा। मुझे उम्मीद है कि सरकार अपना वादा निभाएगी।”

कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में मारे गए लोगों में अहमद भी शामिल थे। इस हमले में कई लोग घायल भी हुए और यह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का एक और जानलेवा असर था, जिसकी चपेट में खाड़ी क्षेत्र के आम नागरिक आए।

यह भी पढ़ें: कारीगर छुट्टी पर, बंदरगाहों पर बिगड़े हालात… ईरान युद्ध से मुश्किल में भारत

पश्चिम एशिया एक बार फिर धधक रहा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ा हुआ तनाव और एक-दूसरे पर हफ्ते भर से जारी हमले, हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों पर हमले, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर छाया खतरा-यह सब मिलकर एक ऐसा भू-राजनीतिक तूफान ला चुके हैं, जिसकी आंच भारत तक सीधे पहुंच रही है। इसका असर भी दिखाई दे रहा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…