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लालू के साथ नहीं रहा कभी दिल का रिश्ता: पासवान

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के साथ पांच साल पुराने संबंध तोड़कर लोकसभा चुनाव में भाजपा से नाता जोड़ने वाले केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का कहना है...

Author July 21, 2015 5:08 PM
रामविलास पासवान, लालू प्रसाद संप्रग एक सरकार में मंत्री थे।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के साथ पांच साल पुराने संबंध तोड़कर लोकसभा चुनाव में भाजपा से नाता जोड़ने वाले केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का कहना है कि साथ रहने के जमाने में भी कभी दोनों के दिल नहीं मिले।

पासवान ने कहा, ‘‘लालू से हमारा कभी दिल से दिल का रिश्ता नहीं रहा। उनका भी हमसे नहीं रहा। मैं कभी लालू के साथ गठबंधन नहीं करना चाहता था। केवल 2010 के विधानसभा चुनावों को छोड़कर मैंने कभी बिहार में लालू के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ा। वर्ष 2009 में, मैं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पहल के कारण संप्रग में था।’’

वह इन सवालों का जवाब दे रहे थे कि लालू से गठजोड़ करने के लिए वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कैसे हमला कर सकते हैं जबकि वह पूर्व में राजद प्रमुख के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ चुके हैं।

वर्ष 2002 के गुजरात दंगों के बाद लोजपा प्रमुख ने सबसे पहले राजग से नाता तोड़ा था और उनकी लोक जनशक्ति पार्टी वर्ष 2009 से राजद के साथ गठबंधन में रही थी।

प्रसाद और पासवान संप्रग एक सरकार में मंत्री थे। संप्रग एक के शुरूआत के कुछ सालों में दोनों के कड़वे संबंध थे जिनके बारे में कहा जाता है कि वे रेल मंत्रालय पर दावेदारी को लेकर पैदा हुए थे।

दोनों 2009 के लोकसभा चुनाव में एक दूसरे के साथ आए थे जब उन्होंने सभी तीनों दलों के लिए निराशाजनक चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस से पल्ला झाड़ लिया था।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद के साथ सीट बंटवारे पर फैसले में देरी से नाखुश पासवान ने लालू की राजद से संबंध तोड़ लिए थे और भाजपा का दामन थाम लिया था जिसने उनकी पार्टी की किस्मत ही खोल दी।

हालिया कुछ महीनों से पासवान लालू की कड़ी आलोचना करते रहे हैं और उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के लिए राजद प्रमुख लालू के एक पनौती साबित होने तक की भविष्यवाणी कर डाली है ।

पासवान ने कहा, ‘‘ लालू एक ऐसे इंसान हैं जो एक हाथ तो गठबंधन सहयोगी की गर्दन पर रखते हैं और दूसरा उसके पैरों पर।’’

लोजपा हालांकि पासवान के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने का संकेत दे चुकी है लेकिन वह स्वयं इससे इंकार करते हैं। लोजपा अध्यक्ष महसूस करते हैं कि बिहार में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने से गठबंधन को मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि यदि राजग सत्ता में आती है तो बड़ी पार्टी होने के नाते मुख्यमंत्री पद पर भाजपा की दावेदारी होगी।

पासवान ने कहा, ‘‘1990 में वी पी सिंह चाहते थे कि मैं मुख्यमंत्री बनूं। मैंने मुख्यमंत्री बनने से इंकार कर दिया। बाद में जब मैं राजग में शामिल हुआ तो वाजपेयी चाहते थे कि मैं बिहार का मुख्यमंत्री बनूं। इसी प्रकार, फरवरी 2005 के चुनाव के बाद मैं मुख्यमंत्री बन सकता था। मैं तीन बार इससे इंकार कर चुका हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इस बार राजग के सत्ता में आने पर मुख्यमंत्री पद पर भाजपा का दावा बनता है। वे सबसे बड़ी पार्टी हैं। हम राजग के तहत नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में लड़ रहे हैं। वो जिसे भी मुख्यमंत्री के रूप में चुनते हैं, वह हमें स्वीकार्य है।’’

यह पूछे जाने पर कि जब राजग को चुनाव जीतने का भरोसा है तो वे बिहार में अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा क्यों नहीं कर रहे हैं, पासवान ने कहा, ‘‘राजग को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा क्यों करनी चाहिए? केवल इसलिए कि लालू और नीतीश ने ऐसा किया है। उनके पास कोई और नहीं है। इसलिए उन्होंने किया। हमारे पास कई अच्छे नेता हैं।’’

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