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सुभाष चंद्र बोस की पड़नातिन ने की नाथूराम गोडसे की पूजा, जवाहरलाल नेहरू को ठहराया गांधी की हत्या का कसूरवार!

शनिवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस प्रशासन को हिंदू महासभा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश देते हुए कहा था कि वह राज्य में गोडसे के महिमामंडन को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

Author ग्वालियर | Updated: November 20, 2019 8:13 AM
नाथूराम गोडसे को गांधी जी की हत्या के जुर्म में हुई थी फांसी। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पड़नातिन राज्यश्री चौधरी ने भी मध्य प्रदेश के ग्वालियर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा की है। इतना ही नहीं उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सरकार को महात्मा गांधी की हत्या के लिए जिम्मेदार भी ठहराया। चौधरी अखिल भारतीय हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने मंगलवार (19 नवंबर) को ग्वालियर के दौलतगंज स्थित दफ्तर में नाथूराम गोडसे की तस्वीर पर माल्यार्पण किया और पूजा की। चौधरी के साथ महासभा की राष्ट्रीय प्रवक्ता निशा कटोच भी थीं।

रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद ये दोनों नेता महासभा के कार्यालय पहुंची और वहां गोडसे की पूजा की। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार सजग हो गई है। घटना पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए राज्य सरकार में मंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी सूरत में राज्य में गोडसे की विचारधारा को फलने-फूलने नहीं देगी और उन्हें पूजने वालों की मंशा नाकाम कर देगी।

बता दें कि शनिवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस प्रशासन को हिंदू महासभा के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश देते हुए कहा था कि वह राज्य में गोडसे के महिमामंडन को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हिंदू संगठन द्वारा गोडसे और सह-साजिशकर्ता नारायण आप्टे को प्रार्थना की पेशकश करने के एक दिन बाद यह कार्रवाई हुई थी।

शुक्रवार की घटना के बाद ग्वालियर पुलिस ने महासभा के प्रवक्ता नरेश बाथम को गोडसे के महिमामंडन के लिए आईपीसी की धारा 153-ए के तहत दर्ज किया था और गांधी को विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, बाथम के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के चार दिन बाद भी, वह अभी भी पुलिस पहुंच से बाहर है। शुक्रवार को नाथूराम गोडसे को फांसी पर चढ़ाए जाने की वर्षगांठ को हिन्दू महासभा ने बलिदान दिवास के रूप में मनाया था और गोडसे की पूजा की थी।

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