नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने युवाओं पर केंद्रित आजाद हिंद पार्टी बनाने की योजना बनाई है। इस पार्टी का उद्देश्य नेताजी के उस विचार को पुनर्जीवित करना है जिसमें सभी धर्मों और संवैधानिक मूल्यों के लिए समान सम्मान पर आधारित पहचान की बात कही गई है।
इसकी घोषणा संभवतः 21 अक्टूबर के आसपास की जाएगी, जिसे आजाद हिंद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन 1943 में उस दिन की याद दिलाता है जब नेताजी ने स्वतंत्र भारत की अंतरिम सरकार की घोषणा की थी। हालांकि नई पार्टी को अभी तक चुनाव आयोग में रजिस्टर नहीं किया गया है लेकिन आवश्यक दस्तावेज जमा होने के बाद औपचारिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
चंद्र बोस 21 अक्टूबर को करेंगे नई पार्टी की घोषणा
चंद्र कुमार बोस ने कहा कि प्रस्तावित प्लेटफॉर्म में पंजाब, ओडिशा, केरल और कर्नाटक सहित कई राज्यों ने रुचि दिखाई है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “यह अभी सिर्फ एक विचार है और इस पर काम चल रहा है। जैसा कि आप जानते हैं 21 अक्टूबर को आज़ाद हिंद दिवस है इसलिए 21 अक्टूबर को घोषणा की जाएगी। पंजीकरण प्रक्रिया चुनाव आयोग पर निर्भर करेगी लेकिन हम सभी दस्तावेज जमा कर देंगे,”
बोस के अनुसार, आजाद हिंद पार्टी सर्व धर्म समभाव के सिद्धांत द्वारा निर्देशित होगी जिसका अर्थ है सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और संविधान के सच्चे लोकाचार को बनाए रखना। उन्होंने कहा, “आज आजादी के 80 साल बाद हमने राजनीतिक आजादी तो हासिल कर ली है लेकिन आर्थिक और सामाजिक आजादी अभी भी अधूरी है। मुख्यधारा की पार्टियां ‘फूट डालो और राज करो’ की रणनीति और वोट बैंक की राजनीति पर निर्भर हैं जो भारत की मूल अवधारणा के लिए खतरा है। नेताजी एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने वास्तव में सभी समुदायों को एक भारतीय पहचान के तहत एकजुट किया।”
नेताजी के पोते बोले- न चुनाव लड़ेंगे और न ही कोई औपचारिक पद ग्रहण करेंगे
नेताजी के परपोते ने कहा कि उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर केंद्रित एक पारंपरिक राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करने के बजाय, यह मंच मुख्य रूप से नागरिक समाज के युवा सदस्यों, हाल ही में स्नातक हुए छात्रों और विद्यार्थियों द्वारा आकार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे एक मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे और न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही कोई औपचारिक पद ग्रहण करेंगे।
हाल ही में हुए जेन जी आंदोलन पर बोस ने कहा कि इस तरह के आंदोलन युवाओं में संस्थागत भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और राजनीतिक निष्क्रियता जैसे मुद्दों को चुनौती देने की बढ़ती इच्छा को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आजाद हिंद पार्टी इसी ऊर्जा को एक सुनियोजित, धर्मनिरपेक्ष और मूल्यों पर आधारित राजनीतिक विकल्प में बदलने का प्रयास करती है। उन्होंने याद दिलाया कि 2013 में हुई एक बैठक के दौरान, तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नई पार्टी बनाने के खिलाफ सलाह दी थी, यह बताते हुए कि उस समय 1600 से अधिक पार्टियां पहले से ही मौजूद थीं। बोस ने इस बात पर निराशा जताई कि भाजपा के भीतर वादा किया गया “आजाद हिंद मोर्चा” कभी साकार नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आजाद हिंद पार्टी संवैधानिक शासन, ईमानदारी और अधिक सामाजिक-आर्थिक समानता को बढ़ावा देने का प्रयास करे।
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