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‘सन 1945 के बाद भी जिंदा थे नेताजी’

मोदी सरकार को नसीहत देने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबधित 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया..

Author कोलकाता | September 19, 2015 9:09 AM
कोलकाता पुलिस संग्रहालय में शुक्रवार को नेताजी से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की गईं। इस मौके पर एक फाइल को गौर से देखतीं ममता बनर्जी। साथ में हैं कोलकाता के पुलिस आयुक्त सुरजीत पुरकायस्थ। (पीटीआई फोटो)

मोदी सरकार को नसीहत देने के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबधित 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया। ये फाइलें लगभग सात दशक से सरकार के पास रखी थीं। फिलहाल इन फाइलों को डिजिटल स्वरूप में डीवीडी के तौर पर जारी करते हुए नेताजी के परिजनों को इसकी पहली प्रति सौंपी गई है।

कोलकाता के पुलिस आयुक्त सुरजीत कर पुरकायस्थ ने इन फाइलों को सार्वजनिक किया। इस मौके पर नेताजी के परिजन भी मौजूद थे। आम लोग सोमवार से यहां पुलिस संग्रहालय में इनको देख सकेंगे। इन गोपनीय फाइलों से तो यही पता चलता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निधन वर्ष 1945 में हुई विमान दुर्घटना में नहीं हुआ था और वे उसके बाद भी जीवित थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेताजी के परिजनों ने भी शुक्रवार को उन फाइलों के हवाले यही दावा किया।

वर्ष 1937 से 1947 के बीच के एक दशक के दौरान नेताजी के जीवन का इतिहास इन 64 फाइलों के 12,744 पन्नों में दर्ज है। इनमें से 55 फाइलें कोलकाता पुलिस के पास थीं और बाकी नौ राज्य पुलिस के पास। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे एक ऐतिहासिक दिन करार दिया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि आज एक ऐतिहासिक दिन है। हमारी सरकार ने नेताजी से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है। आम लोगों को देश के इस वीर सपूत के बारे में जानने का हक है। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि हमने एक शुरुआत कर दी है। अब केंद्र सरकार को भी अपने पास रखी फाइलों को सार्वजनिक कर देना चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

बंगाल सरकार की फाइलों में ब्रिटिश खुफिया एजंसी की जासूसी के अलावा वर्ष 1945 में कोई तीन दर्जन सैनिकों के साथ हुई पूछताछ के अलावा सैकड़ों पत्र भी हैं। लेकिन उनमें कहीं इस बात का सबूत नहीं है कि नेताजी की मौत 1945 में ताइवान में हुई विमान दुर्घटना में हुई थी।

ममता ने कहा कि उन्होंने तमाम फाइलें तो नहीं पढ़ी हैं, लेकिन जितना पढ़ा है उससे लगता है कि नेताजी वर्ष 1945 के बाद भी जीवित थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुख की बात है कि सत्तर साल बाद भी नेताजी की मौत का रहस्य नहीं सुलझ सका है। आखिर इसे कब तक गोपनीय रखा जा सकता है। लोगों को अपने इस महानायक के बारे में जानने का पूरा अधिकार है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, नेताजी से संबंधित जो फाइलें राज्य सरकार के पास थीं, उनमें ज्यादा अहम जानकारियां नहीं हैं। लेकिन उनमें मौजूद पत्रों से पता चलता है कि नेताजी वर्ष 1945 के बाद भी जीवित थे। इससे साफ है कि जिस विमान हादसे में उनकी मौत की बात प्रचारित की गई थी, वे उसमें सवार ही नहीं थे। उन पत्रों में कई लोगों ने नेताजी को विभिन्न स्थानों पर देखने का दावा किया है।

ममता ने मोदी सरकार से नेताजी से जुड़ी सभी फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 70 वर्ष बाद भी उनके लापता होने का रहस्य अभी तक नहीं सुलझा है। कोलकाता पुलिस संग्रहालय का दौरा करने के बाद, ममता ने कहा, ‘यह भविष्य का आरंभ है। लोगों को सच पता होना चाहिए। केंद्र सरकार को भी फाइलों (नेताजी से जुड़ी) को सार्वजनिक करना चाहिए। हम सभी में सद्बुद्धि आए। आप सच को दबा नहीं सकते हैं। सच को सामने आने दें। यह आज नहीं तो कल बाहर आ ही जाएगा।

ऐसा कहा जाता है कि केंद्र सरकार के पास मौजूद नेताजी से जुड़ी फाइलों को गोपनीय सूची से हटाने पर भारत के साथ कुछ देशों के संबंध प्रभावित होंगे, इस बारे में सवाल करने पर ममता ने कहा, अब हमें आजादी मिल गई है। उन नेताओं को सम्मानित करने में कोई नुकसान नहीं है, जिन्होंने हमें आजादी दिलाई। हमें उन्हें सलाम करना चाहिए। फाइलों को गोपनीय सूची से हटाने से पहले हमने देखा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ ना हो। अगर किसी देश के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध हैं तो, हमें उनकी समीक्षा करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि केंद्र के पास रखी 135 फाइलों में नेताजी की मौत के बारे में पक्की जानकारी हो सकती है। राज्य सरकार ने अपने पास रखी फाइलों को सार्वजनिक कर एक राह दिखा दी है। अब केंद्र को इसका अनुसरण करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने के मुद्दे पर जरूरी हो तो केंद्र सरकार एक समिति का गठन कर सकती है। उन फाइलों में अहम जानकारियां हैं।

नेताजी के एक परिजन चंद्र बोस ने इन फाइलों के हवाले से दावा किया कि नेताजी की मौत विमान हादसे में नहीं हुई थी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हावड़ा सीआइडी की ओर से अमेरिकी व ब्रिटिश खुफिया एजंसियों के हवाले भेजे एक पत्र से साफ है कि नेताजी की मौत उस हादसे में नहीं हुई थी।

नेताजी के परिजनों ने भी कहा है कि बंगाल सरकार की ओर से इन फाइलों को सार्वजनिक करने के फैसले से सबक लेते हुए अब केंद्र सरकार को भी ऐसा करना चाहिए। परिजनों ने नेताजी के परिवार वालों की जासूसी की जांच के लिए एक समिति गठित करने की भी मांग की है। चंद्र बोस ने कहा कि यह बात साबित हो चुकी है कि वर्ष 1948 से 1968 के बीच हमारे परिवार की जासूसी की गई थी। इसकी वजह का पता लगाने के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए। बोस ने दावा किया कि कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने नेताजी की मौत के ब्योरे वाली एक फाइल वर्ष 1972 में नष्ट कर दी थी। फिलहाल उस फाइल का सिर्फ कवर ही उपलब्ध है। उन्होंने इस मामले की भी जांच की मांग उठाई है।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि केंद्र नेताजी जी के लापता होने के रहस्य पर गंभीर है और ममता बनर्जी इस मामले को लेकर राजनीति नहीं करें। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एमजे अकबर ने कहा, इस मामले में कोई दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितना सक्रिय नहीं रहा। वे बोस परिवार से मिले और मामले की जटिलता की पड़ताल करने के लिए समिति का गठन किया। हमें विश्वास है कि इस मामले में जो कुछ भी करने की जरूरत है, वे करेंगे।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया, हम प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने का आग्रह करते हैं। जिन फाइलों को राज्य में गोपनीय सूची से बाहर किया है, उनका संभवतया कोई अंतरराष्ट्रीय प्रभाव नहीं है। लेकिन केंद्र के पास जो फाइलें है, उनका विदेशों के साथ देश के संबंधों पर प्रभाव होगा। उन्होंने कहा, मोदी सरकार गंभीर है कि नेताजी के लापता होने के संबंध में सच बाहर आना चाहिए और इसी कारण से प्रधानमंत्री ने समिति का गठन किया।

फॉरवर्ड ब्लाक ने बंगाल सरकार के फैसले का स्वागत किया : ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआइएफबी) ने नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का स्वागत किया और केंद्र से इसका अनुकरण करने और नेताजी से जुड़ी उसके पास जो 135 फाइलें हैं, उन्हें सार्वजनिक करने को कहा।

नई दिल्ली में एआइएफबी के महासचिव देवव्रत बिश्वास ने एक वक्तव्य में कहा, एआइएफबी राज्य सरकार के फैसले का स्वागत करती है। हम उम्मीद करते हैं कि ये दस्तावेज हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के हालात का इस्तेमाल करने की नेताजी की योजना और प्रक्रिया पर और प्रकाश डालेंगे। उन्होंने कहा, यह तत्कालीन कांग्रेस पार्टी की नेताजी को स्वतंत्र भारत से दूर रखने की साजिश का भी खुलासा करेंगी। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था।

बिश्वास ने इन दलीलों को अधिक महत्त्व नहीं दिया कि केंद्र द्वारा फाइलों को सार्वजनिक करने से अन्य देशों के साथ संबंधों में तनाव आएगा। उन्होंने कहा कि इसका कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के युग में सभी देश एक-दूसरे के साथ संबंध वाणिज्यिक आधार पर रख रहे हैं।

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