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क्‍या गुमनामी बाबा ही थे नेताजी? बाबा के बक्‍से में मिली नेताजी की फैमिली फोटो, कई पत्र

तस्वीर में नेताजी के माता-पिता जानकीनाथ बोस और प्रभावती बोस और परिवार के लोग दिखाई दे रहे हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के तहत गुमनामी बाबा के सामान की जांच की जा रही है।

फैजाबाद (उत्‍त्‍र प्रदेश) के रहस्यमयी गुमनामी बाबा के नेताजी सुभाष चंद्र बोस होने की अटकलों को और बल मिला है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, गुमनामी बाबा के बक्से में नेताजी के परिवार की फोटो मिली है। कोर्ट के आदेश के बाद पिछले करीब 2 हफ्तों से गुमनामी बाबा के सामान की जांच की जा रही है। इसी क्रम में मंगलवार को उनका आखिरी बक्सा खोला गया, जिसमें नेताजी की फैमिली फोटो मिली। गुमनामी बाबा के 26वें बक्से से नेताजी से जुड़े जो सामान मिल रहे हैं, उन्‍हें बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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इन तस्वीरों में नेताजी के माता-पिता जानकीनाथ बोस और प्रभावती बोस और परिवार के लोग दिखाई दे रहे हैं। गुमनामी बाबा के आखिरी बक्से से तमाम ऐसे खत भी मिले हैं जो आजाद हिंद फौज के कमांडर और अन्य अधिकारियों ने उन्हें लिखे थे। इसमें प्रमुख तौर पर आजाद हिंद फौज के कमांडर बताए जा रहे पवित्र मोहर राय का वो पत्र भी शामिल है, जिसमें गुमनामी बाबा को कभी स्वामी, तो कभी भगवन कहकर संबोधित किया गया है। फैजाबाद में सरयू नदी के किनारे गुप्तार घाट में गुमनामी बाबा की समाधि है। 18 सितंबर 1985 में गुमनामी बाबा के निधन के बाद यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

गुमनामी बाबा के बक्से और झोले से मिले सामानों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी होगी, फिर उनकी इन्वेंट्री बनाई जाएगी। इसके बाद टेक्नोलॉजी कमेटी सारे सामान की जांच करेगी। फिर इन्हें अयोध्या में बने इंटरनेशनल रामकथा म्यूजियम में रखा जाएगा। यह पूरी कवायद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के तहत की जा रही है। गौर हो कि सरकारी दस्तावेज के मुताबिक नेताजी की मृत्यु हवाई दुर्घटना में हुई थी हालांकि इस बात के अभी तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी 23 जनवरी को उनसे जुड़े सभी दस्तावेज को सार्वजानिक कर दिया था।

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  1. R
    raj kumar
    Mar 16, 2016 at 6:42 am
    मेरा ख्याल हे की मेरी ही नहीं सभी भारतियों की हार्दिक इच्छा होगी की नेताजी के ऊपर हो रहे भ्रम से पर्दा शीघ्र अति शीघ्र उठा दिया जाये अगर सच में यही नेताजी हैं तो उनकी समाधी स्थल को राष्ट्रीय स्थल घोसित होना चाहिए सरकार न भी करे तो भारत की जनता अपने आप राष्ट्रीय स्थल बना देगी
    (1)(0)
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