पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में चल रहे ऑनलाइन ‘कॉकरोच’ आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने खुद को ‘मानद कॉकरोच’ बताते हुए सरकार से अपील की कि वह युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति को दबाने के बजाय उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर ध्यान दे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह औपचारिक रूप से आंदोलन में शामिल होंगे, तो वांगचुक ने जवाब दिया कि वह सदस्यता के लिए योग्य नहीं हैं, लेकिन वह उस संदेश से सहमत हैं जो समूह द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। वांगचुक ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “कई तरफ से मुझे इस विषय पर बोलने के लिए कहा गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मुझे भी सदस्य बन जाना चाहिए।”
वांगचुक ने कहा, “मुझे लगता है कि मैं इसके योग्य नहीं हूं, मैं न तो बेरोजगार हूं और न ही आलसी। इसलिए, दुख की बात है कि मैं सदस्य नहीं हूं। लेकिन मैं खुद को मानद कॉकरोच मानता हूं।”
वांगचुक ने कहा कि इस अभियान को खतरे के बजाय लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ”जिस तरह आप अखबारों में कार्टून बनाने वालों को इसलिए गोली नहीं मार देते क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या रक्षा मंत्री का व्यंग्यचित्र बनाया है। उसी तरह, यह भी व्यंग्य है। इसे प्रतिक्रिया के रूप में देखें।”
युवाओं ने निराशा को रचनात्मक तरीके से व्यक्त किया- वांगचुक
वांगचुक ने कहा, “मैं इस बात से बेहद प्रभावित हूं कि भारत के युवाओं ने अपनी निराशा को इतने रचनात्मक तरीके से व्यक्त करना चाहा न कि सड़कों पर पत्थर फेंककर, जैसा कि अन्य देशों में हुआ है। इसका सम्मान करना, इसे स्नेहपूर्वक देखना और इसके संदेश को समझना भारत सरकार का कर्तव्य है।” हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि ऑनलाइन मंचों को दबाने से युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है। आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट को बंद किए जाने की खबरों का हवाला देते हुए वांगचुक ने कहा कि प्रशासन को असहमति को दबाने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा, ”नहीं तो क्या होगा? मुझे सुनने में आ रहा है कि उनके अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। फिर यह गुस्सा कहीं भी फैल सकता है।” वांगचुक ने कहा, “नेपाल में हिंसा यूं ही नहीं भड़की। जब इंटरनेट बंद कर दिया गया और अभिव्यक्ति पर रोक लगा दी गई, तो युवा सड़कों पर उतर आए और हालात बेहद खराब हो गए।”
लद्दाख को अभी राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता- गृह मंत्रालय
लंबे वक्त से चली आ रहे असमंजस के बीच एक महत्वपूर्ण सफलता में केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर एक चुनी हुई संस्था बनाने पर सहमति जताई। इस संस्था के पास पूर्ण विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां होगीं। इसके अलावा, सातों जिलों में भी ऐसे ही निकाय बनाए जाएंगे। यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…
