NEET UG 2026 Exam Cancelled: नीट यूजी 2026 को पेपर लीक होने के चलते रद्द कर दिया गया है। एनटीए ने मंगलवार को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। इसको लेकर अब राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की सहमति के बिना ऐसा नहीं हो सकता है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, “यह एक ट्रेंड बन गया है कि जब इम्तिहान होंगे तब लीक होंगे। ये लीक कहां पर हो रहे हैं, ये भी बड़ी दिलचस्प बात है। बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और उत्तराखंड में पेपर लीक हो रहे हैं। ये केवल भाजपा की सरकार में ही लीक होते हैं। इन राज्यों की छात्रों के प्रति कुछ खास दिलचस्पी है। पेपर 2016, 2019, 2021, 2024 और अब 2026 में लीक हुए हैं।”
सत्ता में बैठे लोगों की सहमति के बिना नहीं हो सकता- कपिल सिब्बल
कपिल सिब्बल ने कहा, “सत्ता में बैठे लोगों की सहमति के बिना ऐसा नहीं हो सकता। इनको सीबीआई आरोपी दिखा नहीं सकती है। यह खबर 2-3 दिन पुरानी है, तो उन्होंने इतना लंबा इंतजार क्यों किया? तुरंत एफआईआर दर्ज करके सीबीआई को जांच के लिए सौंप देनी चाहिए। उनके पास राजस्थान सरकार और सीबीआई दोनों हैं, फिर भी वे दोषियों को नहीं पकड़ पाएंगे।”
वरिष्ठ वकील ने आगे कहा, “ये बताओं की ये जो बेचारे छात्र हैं, सालो-साल पढ़कर तैयार होकर इम्तिहान देते हैं, उनके बारे में क्या कोई सोचता है। छात्र दोबारा पढ़ाई करेंगे और दोबारा फिर से इम्तिहान होगा। लोग बाहर से आते हैं, पैसा लगता है। गरीब आदमी के भी बच्चे आते हैं। उनको फिर से दोबारा ये सब करना पड़ेगा। मैं तो मानता हूं कि जिस सरकार में भी यह सब हो रहा है, उनको सजा के तौर पर जो भी सरकार के मंत्री हैं, उनको रिजाइन करना चाहिए। अनपढ़ लोग बैठ गए, कुछ मुख्यमंत्री बन गए तो पेपर तो लीक होंगे ही। अब वक्त बदलाव का आ गया है।”
नीट यूजी पेपर कैसे हुआ लीक?
नीट यूजी 2026 को पेपर लीक होने के चलते रद्द कर दिया गया है। एनटीए ने मंगलवार को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की। साथ ही एनटीए ने बताया कि यह परीक्षा अब दोबारा आयोजित की जाएगी। एनटीए की ओर से रीएग्जाम की तारीख का जल्द ही ऐलान किया जाएगा। इस बीच राजस्थान से भी एक संदिग्ध लीक का खुलासा हुआ है। नीट पेपर लीक की जांच एक WhatsApp मैसेज से शुरू हुई जिसे कई बार फॉरवर्ड किया गया था। जांच कर रहे अधिकारियों को यह मैसेज एक कथित “गेस पेपर” की जांच के दौरान मिला। शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सिर्फ एक छोटा मामला है, लेकिन बाद में पता चला कि यह मैसेज बड़े स्तर पर कई लोगों को फॉरवर्ड किया गया था। पढ़ें पूरी खबर…
