नीट पेपर लीक और री-एग्जाम को लेकर देशभर में सियासत गरम है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार को कोटा पहुंचकर छात्रों के मुद्दों पर अपनी मुहिम शुरू करने वाले हैं, जबकि बीजेपी उनके दौरे का विरोध कर रही है। लेकिन इस राजनीतिक टकराव के बीच कोटा के छात्र और अभिभावक एक अलग ही बात कह रहे हैं। उनका साफ कहना है कि एक पार्टी पेपर लीक रोक नहीं पाई और दूसरी परीक्षा से ठीक पहले राजनीति कर रही है। ऐसे समय में वे सिर्फ पढ़ाई करना चाहते हैं और राजनीति से दूर रहना चाहते हैं।
देश की सबसे बड़ी कोचिंग नगरी कोटा इन दिनों 21 जून को होने वाली नीट (NEET) पुनर्परीक्षा की तैयारियों में जुटा हुआ है। हजारों छात्र दोबारा परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी की सभा और उस पर छिड़ी राजनीतिक बहस को लेकर छात्रों और अभिभावकों में खास उत्साह नहीं दिख रहा है।
राहुल गांधी बुधवार शाम कोटा के दशहरा मैदान में छात्रों को संबोधित करेंगे। कांग्रेस इस कार्यक्रम को शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद बता रही है। पार्टी के नेताओं ने छात्रों और कोचिंग संस्थानों से संपर्क कर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की है।
मंगलवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छात्रों के नाम संदेश जारी कर मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ियां, रद्द हुई भर्तियां, बढ़ती फीस और निजीकरण ने करोड़ों युवाओं के सपनों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने छात्रों से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
अभिभावक बोले- यह विरोध काफी देर से हो रहा है
लेकिन कोटा में मौजूद कई अभिभावकों का मानना है कि यह विरोध काफी देर से हो रहा है। नोएडा से अपनी बेटी के साथ कोटा आईं साधना कहती हैं कि जब पेपर लीक की खबर सामने आई थी तब विरोध होना चाहिए था। अब परीक्षा में सिर्फ चार दिन बचे हैं, ऐसे में वे अपनी बेटी को किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं भेजेंगी।
मध्य प्रदेश की विमला चौबे भी कुछ ऐसा ही सोचती हैं। उनकी बेटी अगले साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा देगी। विमला मानती हैं कि पेपर लीक ने छात्रों का भरोसा हिला दिया है, लेकिन उनका कहना है कि बच्चे कोटा पढ़ाई के लिए आते हैं, राजनीतिक रैलियों में शामिल होने के लिए नहीं।
सबसे तीखी प्रतिक्रिया वाराणसी की 19 वर्षीय छात्रा सुहाना खान की रही। उसने कहा, “नेताओं को आखिर छात्रों की कितनी चिंता है? एक पार्टी इतनी लापरवाह है कि पेपर लीक हो जाता है और दूसरी परीक्षा से कुछ दिन पहले राजनीतिक ड्रामा कर रही है।”
दिल्ली की नीट अभ्यर्थी रुतिका भी राहुल गांधी के कार्यक्रम को राजनीतिक स्टंट मानती हैं। उनका कहना है कि अगर छात्रों की चिंता इतनी ही थी तो विरोध प्रदर्शन बहुत पहले होना चाहिए था।
राहुल गांधी के कार्यक्रम की तैयारियों के लिए कांग्रेस के कई बड़े नेता कोटा पहुंच चुके हैं। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंगलवार को शहर में मौजूद रहे। कांग्रेस को उम्मीद है कि करीब 10 हजार छात्र कार्यक्रम में शामिल होंगे। हालांकि पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि कार्यक्रम का कोई राजनीतिक मकसद नहीं है।
दूसरी ओर बीजेपी भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में लगी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में सरकार पहले ही कार्रवाई कर चुकी है और राहुल गांधी का दौरा सिर्फ राजनीतिक नाटक है। बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी राहुल गांधी को “राजनीतिक पर्यटक” बताते हुए उन पर छात्रों के मुद्दों का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया।
इस बीच कोचिंग संस्थान भी छात्रों की तैयारी में जुटे हुए हैं। री-एग्जाम के कारण कई छात्र वापस कोटा लौट आए हैं। हॉस्टल और पीजी संचालक रोजाना के हिसाब से कमरे उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि कई कोचिंग संस्थान मुफ्त मॉक टेस्ट आयोजित कर रहे हैं ताकि छात्र बेहतर तैयारी कर सकें।
एक कोचिंग संस्थान के कर्मचारी का कहना है कि संस्थान छात्रों को किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भेजने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मोटिवेशनल कार्यक्रमों पर भी अभिभावक आपत्ति जताते हैं, ऐसे में राजनीतिक सभा में भेजना लगभग असंभव है।
कोटा उत्तर से कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने कहा कि राहुल गांधी का कार्यक्रम राजनीतिक नहीं बल्कि छात्रों से बातचीत का मंच है। उन्होंने माना कि री-एग्जाम की तैयारी कर रहे कई छात्र शायद इसमें शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य खास तौर पर उन छात्रों को मंच देना है जो आने वाले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाएं देने वाले हैं।
उधर कांग्रेस और बीजेपी के बीच पेपर लीक को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस सरकार के समय कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियां हुई थीं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उसकी सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाया था।
लेकिन इन तमाम राजनीतिक आरोपों और जवाबी आरोपों के बीच छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ परीक्षा और भविष्य है। 21 जून को री-एग्जाम देने जा रही एक छात्रा की मां नमिता बारंडवाल कहती हैं कि सभी राजनीतिक दल अपने हित साधने में लगे हैं, जबकि बच्चे भारी तनाव से गुजर रहे हैं। उनके मुताबिक पेपर लीक न केवल छात्रों का मनोबल तोड़ता है बल्कि माता-पिता की चिंता भी कई गुना बढ़ा देता है। कोटा में इस समय सबसे ज्यादा सुनाई देने वाली आवाज शायद यही है – छात्रों को राजनीति नहीं, अपनी परीक्षा और भविष्य की चिंता है।
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NEET-UG 2026 के री-एग्जाम से पहले पेपर लीक की अफवाहों और साइबर ठगी पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार और NTA ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने बताया कि Telegram पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगाई गई है। यह फैसला परीक्षा से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं और फर्जी दावों के प्रसार को रोकने के इरादे से लिया गया है। इसके अलावा, मैसेज एडिट फीचर को 30 जून तक बंद रखने का फैसला किया गया है जिससे फर्जी स्क्रीनशॉट और बदले हुए संदेशों के जरिए छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों पर अंकुश लगाया जा सके। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
