NEET Paper Leak Effects on UP Elections: पेपर लीक के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और कानून को ज्यादा सख्त करने का ऐलान किया था। इसके ठीक एक दिन बाद यूपी बीजेपी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लखनऊ में नीट परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों से मुलाकात की। उन्हें आश्वासन दिया गया कि मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्र हैं और वे हिंत में विभिन्न निर्णय ले रही है।

पंकज चौधरी ने कहा था कि छात्र किसी पक्ष या विपक्ष से संबंधित नहीं होते। हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि पेपर लीक होना एक समस्या है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में दर्जनों पेपर लीक हुए हैं, लेकिन मोदी सरकार ने इस सिस्टम को लीक प्रूफ बनाने कड़े कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए हैं।

कांग्रेस कार्यालय तक निकाला था मार्च

यूपी बीजेपी अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि पिछले एक महीने में तीन पेपर हुए हैं लेकिन वे सारे लीक प्रूफ थे। सरकार और विपक्ष पूरी तरह से सफल रही है। इससे पहले बुधवार को पंकज चौधरी ने लखनऊ में वीवीआईपी गेस्ट हाउस से कांग्रेस कार्यालय तक एक मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी द्वारा मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री के आवास के बाहर किए गए धरने का विरोध किया गया।

बीजेपी के ही एक नेता ने कहा, “भाजपा का लखनऊ मार्च केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए था, जिन्हें पेपर लीक के विरोध में छात्रों के प्रदर्शन और 20 जुलाई को दिल्ली में उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद जनता के सवालों का सामना करना पड़ रहा था।”

यूपी चुनाव को लेकर चिंतित बीजेपी

बीजेपी के सूत्रों का मानना ​​है कि छात्रों के साथ पंकज चौधरी की मुलाकात इस बात का संकेत है कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन और 2027 की शुरुआत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर पार्टी और उसकी उत्तर प्रदेश सरकार के भीतर बेचैनी और आशंकाएं हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि पंकज चौधरी ने उस प्रतिकूल धारणा का मुकाबला करने की कोशिश की, जो 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारी छात्रों पर दिल्ली पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के वीडियो सोशल मीडिया पर छा जाने के बाद उत्पन्न हुई थी।

पुलिस के लाठीचार्ज का नाकारात्मक संदेश

एक बीजेपी नेता ने कहा, “विरोध प्रदर्शन में शामिल वास्तविक छात्रों की संख्या भले ही कम हो लेकिन पुलिस द्वारा उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने से लोगों को नकारात्मक संदेश मिला है। हर परिवार में कोई न कोई छात्र या नौकरी की चाह रखने वाला युवा है और छात्रों की मांगों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया में देरी और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज ने हर भारतीय परिवार को आहत किया है।”

एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा, “प्रधानमंत्री ने आधी रात में पेपर लीक के खिलाफ एक सख्त नए कानून का प्रस्ताव देने वाले वीडियो के बाद पंकज चौधरी की मेडिकल उम्मीदवारों से मुलाकात से संकेत मिलता है कि यूपी बीजेपी इस तरह के लीक और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों तथा जवाबदेही तय करने की उनकी मांगों को लेकर काफी चिंतित है। हालांकि, यूपी समेत पांच राज्यों में 2027 में होने वाले आगामी चुनावों पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी?।”

भाजपा सूत्रों के अनुसार, राज्य स्तर पर पार्टी नेतृत्व विशेष रूप से चिंतित है क्योंकि “विभिन्न परीक्षाओं, विशेषकर भर्ती परीक्षाओं में परीक्षा परिणाम लीक होने से युवाओं में व्याप्त असंतोष” उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के प्रमुख कारणों में से एक था। इन चुनावों में पार्टी की सीटों की संख्या राज्य की 80 सीटों में से 62 से घटकर 33 रह गई, जबकि उसका वोट शेयर 49.98% से गिरकर 41.37% हो गया। उस समय समाजवादी पार्टी (एसपी) ने 37 सीटें जीती थीं, जो लोकसभा चुनावों में उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।

बीजेपीके एक पदाधिकारी ने बताया कि गुरुवार को जब वे लखनऊ की एक फार्मेसी में गए, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने पेपर के लीक होने और छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा, “वे पूछ रहे थे कि सरकार ने युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मांगों पर इतनी देर से प्रतिक्रिया क्यों दी।”

पहले ही इस्तीफा दे दिया होता तो…

पार्टी के एक अन्य नेता ने शनिवार को कहा कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मई में NEET लीक के तुरंत बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा देने में देरी न की होती, तो सरकार के खिलाफ युवाओं का गुस्सा इतना तीव्र नहीं होता और विपक्ष को भी इस मुद्दे का फायदा उठाने का मौका नहीं मिलता। अब प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है, लेकिन एक अहम सवाल यह बना हुआ है कि इसमें इतनी देरी क्यों हुई।

उन्होंने याद दिलाया कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी ने हवाला मामले में सीबीआई द्वारा आरोपित किए जाने के बाद 1996 में लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था और लाल बहादुर शास्त्री ने 1956 में एक ट्रेन दुर्घटना के बाद रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे मंत्री जवाबदेही के लिए एक ऐतिहासिक मिसाल कायम हुई थी।

बीजेपी नेताओं को उम्मीद है कि नीट पेपर लीक के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के मद्देनजर पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ धारणा जल्द ही बदल जाएगी। एक वरिष्ठ नेता ने पूछा, “लेकिन सरकार को यह सब पहले ही कर लेना चाहिए था। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के आंदोलन को कम करके आंका। कई लोग पूछ रहे हैं कि सरकार ने 20 जुलाई से पहले प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करके उनके साथ समझौता क्यों नहीं किया?”

विपक्ष के खिलाफ नए सिरे से प्लान बनाएगी BJP?

कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों से मुलाकात और धरना प्रदर्शन पर ध्यान देते हुए बीजेपी के एक नेता ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि लेकिन उनकी यह रणनीति विफल होगी क्योंकि मोदी सरकार द्वारा पेपर लीक के खिलाफ उठाए गए नए कदम नुकसान को कम करेंगे और युवाओं को सकारात्मक संदेश देंगे।

एक अन्य पार्टी नेता ने कहा कि दिल्ली से सामने आए कुछ हालिया वीडियो जिनमें युवा प्रधानमंत्री और बीजेपी या RSS के खिलाफ अशोभनीय नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बीजेपी विरोधी ताकतों ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया है। बीजेपी एमएलसी और पूर्व एबीवीपी नेता संतोष सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को उन्होंने दिल्ली में समाजवादी पार्टी के सहयोगी युवा संगठन समाजवादी युवजन सभा और समाजवादी छात्र सभा के कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च में भाग लेते देखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक छात्रों की मांगों पर कार्रवाई कर रही है। लेकिन शहरी नक्सलवादी लोगों ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया है। लगभग 70 प्रतिशत प्रदर्शनकारी राजनीतिक दलों से थे। संतोष सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने कागजात लीक होने के बाद तुरंत कार्रवाई की और दोषियों को गिरफ्तार किया, लेकिन सदन में विवरण साझा करने का अवसर नहीं मिला क्योंकि विपक्ष ने मौजूदा मानसून सत्र के दौरान संसद को अभी तक काम नहीं करने दिया है।

संतोष सिंह ने कहा कि किसानों द्वारा इसी तरह के विरोध प्रदर्शन 2020-21 में 2022 के उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले हुए थे। उन्होंने कहा कि इन किसान विरोध प्रदर्शनों का उत्तर प्रदेश चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि केंद्र ने दिसंबर 2021 में इन विधेयकों को निरस्त कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का भी आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिनमें भाजपा लगातार तीसरी बार जीत हासिल करेगी।

हालांकि भाजपा ने 2022 के चुनाव जीते, लेकिन उसकी सीटों की संख्या 2017 में जीती गई 309 सीटों से घटकर 403 में से 255 रह गई। वहीं, समाजवादी पार्टी की सीटों की संख्या 2017 में 47 से बढ़कर 2022 में 111 हो गई।

6 महीने रहना होगा सतर्क

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश और केंद्र में पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों को अगले छह महीनों में सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के हालिया आश्वासनों के बाद अगले कुछ महीनों में किसी भी परीक्षा में पेपर लीक होता है, तो 2027 के यूपी चुनावों में भाजपा को इसका भारी नुकसान होगा। हाल ही में हुए युवा विरोध प्रदर्शनों में सपा की आक्रामक भागीदारी का मुकाबला करने के लिए, यूपी भाजपा नेताओं ने सपा की पिछली सरकारों पर “परीक्षाओं में नकल को बढ़ावा देने और भर्तियों में अनियमितताओं में लिप्त होने” के आरोप लगाए हैं।

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