सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा, ”हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि प्रधानमंत्री खुद नीट एग्जाम को मॉनीटर कर रहे हैं।

अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, कथित प्रश्नपत्र लीक और छात्रों पर पड़े प्रभाव का मुद्दा उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए दोबारा परीक्षा कराने सहित कई मांगें रखीं।

NEETएक योग्यता परीक्षा है जिसे देशभर में स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए लाखों युवा छात्र-छात्राएं देते हैं। अदालत ने पिछले सप्ताह प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करने वाली संघीय एजेंसी NTA को पिछली पेपर लीक घटनाओं से सबक नहीं लेने पर फटकार लगाई थी।

‘युवाओं को निराश नहीं कर सकते’

अदालत ने शुक्रवार को कहा, ”जो हुआ है, वह युवाओं के लिए बेहद आघात पहुंचाने वाला है… आप इस तरह युवाओं को निराश नहीं कर सकते।”

सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा में हुई चूक के लिए जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि, ”असल समस्या तब तक खत्म नहीं होगी जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं की जाती।”

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच नीट एग्जाम से जुड़ी विभिन्न पक्षों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें कई सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है। इन मांगों में NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (Computer-Based Test) में बदलने का सुझाव भी शामिल है।

पिछले सप्ताह अदालत ने प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करने वाली NTA की आलोचना करते हुए कहा था कि उसने पहले हुए पेपर लीक मामलों से कोई सबक नहीं लिया। इस सुनवाई में अदालत ने पूछा कि निगरानी और पर्यवेक्षण तंत्र मौजूद होने के बावजूद प्रश्नपत्र लीक कैसे हो गया।

अदालत ने नीट परीक्षा की तुलना UPSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं से करते हुए कहा कि वहां इस तरह की घटनाएं यानी प्रश्नपत्र लीक देखने को नहीं मिलतीं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, ”अगर ऐसा हो रहा है तो यह बेहद आघात पहुंचाने वाला है। हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते। यह सिर्फ छात्र का मामला नहीं है… यह पूरे परिवार का मामला है। इसमें भावनाएं हैं, प्यार है, समय लगा है।”