नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर-सेटिंग ऑपरेशन के अंदर नई दिल्ली में एक बहुत ज़्यादा सुरक्षित जगह है। इसे अच्छी तरह से सील किया जाता है। कोई फ़ोन नहीं, कोई लैपटॉप नहीं, कोई डिवाइस नहीं, कोई इंटरनेट नहीं, एयर-गैप वाले कंप्यूटर, हर डॉक्यूमेंट को ट्रैक करने वाले लॉग, सभी नोट्स की जानकारी है लेकिन फिर भी NEET का पेपर लीक हो गया। इस जगह हो 2024 के NEET लीक के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा को सुरक्षित करने के लिए आखिरी कदम के तौर पर डिज़ाइन किया गया था।

CBI ने 13 लोगों को किया गिरफ्तार

NEET-UG 2026 लीक जांच के केंद्र में जो लोग हैं, वे सभी भरोसेमंद अंदर के लोग थे जो परीक्षा प्रक्रिया के सबसे सुरक्षित फेज में शामिल थे। गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक ने पिछले साल के NEET पेपर पर भी काम किया था। इसके बावजूद इसका लीक होना सरकार को हिलाकर रख दिया है। CBI ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पेपर ट्रांसलेटर, सब्जेक्ट एक्सपर्ट और बिचौलिए शामिल हैं, जिन पर 3 मई को हुई परीक्षा से पहले क्वेश्चन पेपर के कुछ हिस्से सर्कुलेट करने का आरोप है। द इंडियन एक्सप्रेस ने NEET-UG 2024, 2025 और 2026 से जुड़े एक दर्जन से ज़्यादा अधिकारियों, NTA के अंदर के लोगों और एक्सपर्ट्स के साथ इंटरव्यू किए, जिनसे पता चलता है कि इस बात पर आम सहमति है कि संस्थागत नाकामी की वजह से पेपर लीक के हालात बने।

उनका मानना है कि दो चीजें गलत हुईं। एक 2024 के विवाद के बाद बनाया गया सिक्योरिटी फ्रेमवर्क, जिसे अंदर से कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशन्स या CONOP के नाम से जाना जाता है और 2026 में लागू नहीं किया गया। वहीं जिस व्यक्ति ने उस फ्रेमवर्क को बनाया और उसकी देखरेख की थी, वह गलत समय पर चला गया, जिससे एग्जाम की तैयारी के सबसे सेंसिटिव फेज के दौरान सिस्टम में नेतृत्व का खालीपन बन गया।

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हम बड़े मुद्दे को समझ नहीं पा रहे हैं। अगर कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशन्स प्रोटोकॉल वैसे काम कर रहे होते जैसे उन्हें करना चाहिए था, तो किसी के लिए भी पेपर के पूरे सेक्शन को एक्सेस करना, रखना और सर्कुलेट करना बहुत मुश्किल होता।” इस मामले पर शिक्षा मंत्रालय और NTA ने पूछे गए सवाल का जवाब नहीं दिया।

दो लीक और अलग-अलग फेलियर

यह समझने के लिए कि 2026 में क्या गलत हुआ होगा, सबसे पहले यह समझना होगा कि यह विवाद 2024 से कैसे अलग है। NEET-UG 2024 स्कैंडल उन कमियों से शुरू हुआ जो पेपर के NTA सिस्टम से निकलने के बाद सामने आईं। इसमें प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, बैंक स्टोरेज और एग्जाम सेंटर तक ले जाने के दौरान घटनाक्रम शामिल थे। उस साल लीक झारखंड में हुआ था। NEET-UG 2025 से पहले उन कमियों को काफी हद तक दूर कर दिया गया था, इसके लिए कड़े प्रोटोकॉल की एक सीरीज़ बनाई गई थी, जिनके केंद्र में CONOP थे। इन्हें 2024 के विवाद के बाद बनी एक हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशों पर शुरू किया गया था। इसी कमेटी के चार सदस्यों को 2025 के लिए CONOP को लागू करने की देखरेख का काम सौंपा गया था।

CONOP कैसे लागू होता है?

CONOP के दो अलग-अलग फेज होते हैं। पहले में पेपर-सेटिंग शामिल है, जो महीनों पहले, दिसंबर और फरवरी के बीच होती है। दूसरे में पेपर ट्रांसपोर्टेशन शामिल है, जो एग्जाम के करीब अप्रैल में होता है। 2024 में यह दूसरा फेज़ था जिसमें कॉम्प्रोमाइज यानी लीक हुआ था। 2026 में अधिकारियों का अब मानना है कि यह पहला फेज़ था, जहां गड़बड़ी आई। इस फेज़ में सबसे ज़्यादा टाइट सील किया जाना था।

CONOP रूम के अंदर क्या होता है?

2024 के बाद लाए गए प्रोटोकॉल ने पेपर-सेटिंग इकोसिस्टम को असरदार तरीके से एक सील्ड ऑपरेशन में बदल दिया, जो लगभग IIT द्वारा JEE एडवांस्ड परीक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बहुत ज़्यादा सीमित सिस्टम जैसा ही था। CONOP रूम खुद जगन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स और चीफ पेपर सेटर्स की मदद से पेपर सेट किए जाते थे और पूरी तरह से सेल्फ-कंटेन्ड बनाया गया था। किताबें, स्टोरेज की सुविधाएं, एक रेफ्रिजरेटर, माइक्रोवेव और पेंट्री, सब अंदर दिए गए थे, ताकि पेपर सेटर्स, ट्रांसलेटर, वेटर्स और डोमेन एक्सपर्ट्स को बाहर निकलने की कोई जरूरत न हो। एंट्रेंस पर एक वेस्टिबुल था जहां टीम मेंबर्स को अपना सारा पर्सनल सामान (फ़ोन, लैपटॉप, iPad, पेन ड्राइव) छोड़ना पड़ता था। उस पॉइंट के आगे कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने की इजाज़त नहीं थी। वहां इंटरनेट एक्सेस नहीं था।

सिर्फ़ ऑथराइज़्ड CONOP टीम मेंबर्स ही अंदर जा सकते थे। सारा ट्रांसलेशन का काम एयर-गैप्ड कंप्यूटर पर किया जाना था, जो इंटरनेट और एक्सटर्नल नेटवर्क से फिजिकली डिस्कनेक्टेड थे, और हर बार जब कोई डॉक्यूमेंट खोला जाता था तो फ़ाइल एक्सेस लॉग ट्रैक किए जाते थे। दिन के आखिर में टेबल पर कोई भी सामान नहीं छोड़ा जाना था। हर शाम कमरे को चीफ पेपर सेटर या चीफ़ वेटर लॉक और सील कर देता था, जिसके पास ही चाबी होती थी। टीम के सदस्यों को पेपर-सेटिंग ऑपरेशन के दौरान किसी भी बाहरी एक्टिविटी में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया था।

2025 प्रोटोकॉल से वाकिफ़ एक व्यक्ति ने कहा, “कोई भी फ़ोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव या बाहरी डिवाइस कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशन रूम में नहीं आ सकते थे। सिस्टम के अंदर आने-जाने और एक्सेस पर भी कड़ा कंट्रोल होना था।”

इसी सिस्टम के अंदर या कम से कम इसके नियमों से बंधे सिस्टम के अंदर, वे ट्रांसलेटर काम कर रहे थे जिन पर अब लीक का आरोप है। NEET-UG 13 भाषाओं में होता है, जिसका मतलब है कि परीक्षा से पहले अंग्रेज़ी पेपर का रीजनल भाषाओं में ट्रांसलेशन होना चाहिए। वह ट्रांसलेशन का काम (जिसे पेपर-सेटिंग जितना ही सेंसिटिव माना जाता है) CONOP रूम के अंदर उन्हीं कड़े प्रोटोकॉल के तहत होना था।

ट्रांसलेटर पर है आरोप

ट्रांसलेटर के तौर पर गिरफ्तार किए गए तीनों लोग पेपर का मराठी में ट्रांसलेशन करने में शामिल थे। रिटायर्ड केमिस्ट्री टीचर पीवी कुलकर्णी कथित तौर पर मराठी ट्रांसलेशन प्रोसेस से जुड़े हैं, उनपर केमिस्ट्री सेक्शन लीक करने का आरोप है। जांच करने वालों के मुताबिक पुणे की टीचर मनीषा हवलदार ने कथित तौर पर फिजिक्स सेक्शन लीक किया, जबकि मनीषा मंधारे पर बॉटनी और जूलॉजी के सवाल लीक करने का शक है। खास बात यह है कि पीवी कुलकर्णी 2025 के एग्जाम के लिए केमिस्ट्री सेक्शन के ट्रांसलेशन में भी शामिल थीं, वही एग्जाम जिसे बचाने के लिए CONOP बनाया गया था।

एग्जाम प्रोसेस से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “पेपर-सेटिंग और ट्रांसलेशन के दौरान CONOP का पूरा लॉजिक यह है कि कोई भी व्यक्ति पेपर के पूरे सेक्शन को सिस्टम के बाहर आसानी से एक्सेस, रख या मूव न कर सके। अगर जांच करने वाले अब यह आरोप लगा रहे हैं कि पेपर के अलग-अलग सेक्शन से जुड़े लोगों के साथ ऐसा हुआ, तो ज़ाहिर है कि यह सवाल उठता है कि क्या 2025 में बनाए और लागू किए गए सेफगार्ड 2026 में भी उतनी ही सख्ती से लागू किए गए थे।”

नेतृत्व में बदलाव से शुरू हुई मुश्किल

अधिकारियों का कहना है कि प्रोटोकॉल अपने आप फेल नहीं हुए। कुछ लोग इसे बदलाव की वजह से मानते हैं। 2024 के विवाद के बाद सरकार ने NTA चीफ सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया और पीएस खरोला को एडिशनल चार्ज दिया, जो उस समय इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। पीएस खरोला ने 2025 के लिए पूरे CONOPs फ्रेमवर्क के डिजाइन और इम्प्लीमेंटेशन की देखरेख की। लेकिन NTA में उनका बढ़ा हुआ कार्यकाल 19 अक्टूबर 2025 को खत्म हो गया। ठीक उसी समय जब NEET-UG 2026 के लिए पेपर-सेटिंग साइकिल शुरू होने वाला था।

अक्टूबर और जनवरी के बीच जो पेपर-सेटिंग की तैयारी के लिए बहुत ज़रूरी समय माना जाता है, NTA का एडिशनल चार्ज नवोदय विद्यालय समिति के चेयरपर्सन राजेश लखानी ने संभाला। राजेश उसी समय कहीं और अपनी मुख्य भूमिका में काम कर रहे थे। एक परमानेंट हेड अभिषेक सिंह को 3 मई की परीक्षा से सिर्फ़ एक महीने पहले अपॉइंट किया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि सबसे सेंसिटिव समय में नेतृत्व में खालीपन आ गया। पीएस खरोला ने जो प्रोटोकॉल बनाए थे और जिन्हें उन्होंने खुद सपोर्ट किया था, उनका कोई पक्का ओनर नहीं था क्योंकि उन्हें पहली बार उनके बिना लागू किया जा रहा था।

एक अधिकारी ने कहा, “2025 के CONOPs 2026 में आसानी से लागू नहीं हुए। यही प्रॉब्लम की जड़ है। ये प्रोटोकॉल खुद से लागू नहीं होते। इनके लिए इंस्टीट्यूशनल ओनरशिप, लगातार लागू करने और ऐसी लीडरशिप की ज़रूरत होती है जो समझे कि क्या दांव पर लगा है।”

3 मई को क्या हुआ?

3 मई को शिक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ जारी की जिसमें NEET-UG 2026 के लिए मौजूद बड़े मॉनिटरिंग सिस्टम के बारे में बताया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तैयारियों की निगरानी के लिए NTA हेडक्वार्टर का दौरा किया, जबकि मंत्रालय के अधिकारियों ने अंबेडकर भवन में एक कंट्रोल रूम से 48 घंटे तक एग्जाम सेंटर्स पर चौबीसों घंटे नज़र रखी।

हालांकि कुछ ही दिनों में NTA को केमिस्ट्री में संभावित लीक की जानकारी मिली। यह एक ईमेल से शुरू हुआ। 7 मई को बिना किसी अटैचमेंट के एक टिप-ऑफ आया, बस एक आरोप था कि एग्जाम से पहले केमिस्ट्री के सवाल लीक हो गए थे। एजेंसी ने अगले दिन व्हिसलब्लोअर को ट्रैक किया और ऑनलाइन सर्कुलेट हो रहे एक गेस पेपर का PDF हासिल किया। केमिस्ट्री के सवाल मैच हो गए।

9 मई को सरकार के सबसे बड़े लेवल को शक वाले लीक के बारे में बताया गया, लगभग उसी समय पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारी चल रही थी। NTA और शिक्षा मंत्रालय से कहा गया कि पहले शक को कन्फर्म करें, और अगर वेरिफाई हो जाए, तो एग्जाम कैंसिल कर दें।

9 और 10 मई को राजस्थान में सीकर पुलिस (जहां व्हिसलब्लोअर था) ने वेरिफाई किया कि क्या एग्जाम से पहले गेस पेपर PDF सर्कुलेट किया गया था। 11 मई को उन्होंने कन्फर्म किया कि ऐसा हुआ था, जिससे यह पता चला कि लीक 3 मई से पहले हुआ था। NTA ने ऑफिशियली मिनिस्ट्री को लिखा। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर CBI से संपर्क किया। 12 मई को सरकार ने घोषणा की कि एग्जाम कैंसिल कर दिया गया है और जांच CBI को सौंप दी गई है।

अधिकारियों ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि लीक के सबूत के बावजूद रिजल्ट को जारी रखने से (जिसे एक अधिकारी ने पेपर लीक इकॉनमी कहा) उसे और मजबूती मिलती। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “हां, कुछ गलत हुआ। लेकिन एक राय यह थी कि अगर परीक्षा जारी रहने दी गई, तो यह मैसेज जाएगा कि एग्जाम माफिया के लिए कोई असली नतीजा नहीं होगा। अगर किसी ने क्वेश्चन पेपर खरीदने में लाखों खर्च किए हैं, तो सिस्टम को यह भी पक्का करना चाहिए कि उसके भी नतीजे हों।”

आगे क्या होगा?

21 जून को होने वाले NEET-UG री-टेस्ट से पहले CONOP फिर से फोकस में हैं। पेपर सेट करने के लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स का एक नया बैच लाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने उठाए जा रहे खास कदमों के बारे में बताने से मना कर दिया। 27 मई को ISRO के पूर्व चीफ के राधाकृष्णन के साथ एक मीटिंग हुई, जिनकी कमिटी की सिफारिशों ने असल में 2025 CONOP फ्रेमवर्क को आकार दिया था। यह प्रोसेस के पहले हिस्से, पेपर-सेटिंग, के बारे में है। दूसरे चरण के लिए, इस बात पर चर्चा चल रही है कि क्या प्रिंटिंग के बाद क्वेश्चन पेपर्स के सुरक्षित ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज को मजबूत करने के लिए डिफेंस फोर्सेज से मदद ली जानी चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि प्रधानमंत्री खुद नीट एग्जाम को मॉनीटर कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक