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भला यह भी कोई सफलता है, हद है! रवीश कुमार ने मोदी सरकार पर साधा निशाना तो विरोधियों ने मारा ताना

रवीश ने आगे यह भी तंज कसा, "इसी तरह से परिवहन मंत्री को भी ट्वीट कर देना चाहिए कि कितनी कारें हाइवे पर चली हैं। उसे भी सफलता में गिना दें। हद है!"

NDTV से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक, “कहां एक दिन में दो करोड़ यात्री सफर करते थे और कहां एक दिन में पांच लाख कर रहे हैं। यह कोई बताने लायक़ सफलता है?” (फाइल फोटोः fb-RavishKaPage/एक्सप्रेस)

Indian Railways ने सात दिनों में प्रवासी मजदूरों समेत 33 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया। यह बात केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उपलब्धि के तौर गिनाई, जिस पर टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने उन्हें और नरेंद्र मोदी सरकार को निशाने पर लिया। कुमार ने दो टूक कहा, “भला यह भी कोई सफलता है, हद है!” हालांकि, इस मसले पर रवीश को सोशल मीडिया पर विरोधियों के ताने का सामना करना पड़ा।

दरअसल, पत्रकार की टिप्पणी गोयल के उस सोशल पोस्ट पर आई, जिसमें बताया गया था, “कोविड के बाद अनलॉक होते शहरों में प्रवासी कामगारों को पहुंचाने में रेलवे अहम भूमिका निभा रहा है। सात दिनों में करीब 33 लाख यात्री और मजदूरों ने सफर किया। यात्रा के वक्त कोरोना नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है।” रवीश ने उनके पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए फेसबुक पोस्ट में लिखा- सफलता गिनाने की भी हद होती है रेल मंत्री जी! आपने यह सूचना (रेलवे द्वारा पहुंचाने वाली) को ऐसे पेश किया है जैसे कोई बड़ी भारी कामयाबी हो। रेलवे अगर मुफ्त में मज़दूरों को पहुंचाती तो अलग बात थी। अब पहुंचाना भी बड़ी बात हो गई है? क्या रेलवे प्रवासी मज़दूरों की अलग से कोई गिनती करती है? यात्रियों और प्रवासी मज़दूर एक साथ लिख दिया है।

वह आगे बोले- कहां एक दिन में दो करोड़ यात्री सफर करते थे और कहां एक दिन में पांच लाख कर रहे हैं। यह कोई बताने लायक़ सफलता है? इन्हें पता है ऐसे पोस्टरों, दावों और भाषणों से लोगों का विवेक खत्म कर दिया गया है। लोग इन्हें देखते सुनते ही सफलता समझ लेंगे क्योंकि दावा सफलता का है। कोई दिमाग़ नहीं लगाएगा।

रवीश ने आगे यह भी तंज कसा, “इसी तरह से परिवहन मंत्री को भी ट्वीट कर देना चाहिए कि कितनी कारें हाइवे पर चली हैं। उसे भी सफलता में गिना दें। हद है!” हालांकि, इस कटाक्ष को लेकर पत्रकार को फेसबुक पर विरोधियों और आलोचकों के तारे भी सुनने पड़े। मनोज जोशी ने रवीश के एक पुराने ट्वीट को साझा करते हुए लिखा- र विष कु..पत्रकारिता तो आप कर रहे हैं। हद है! रात दिन ट्विटर पर गिद्ध-उल्लू की तरह आंएं गड़ाए रहना। कुछ समझ न आए तो अंबानी का इंटरनेट है ही। वाकई महान क्रांतिकारी पत्रकार हैं, हद है!

अंबुज सिंह सिसोदिया ने कहा, “आपकी समस्या क्या है? नकारात्मकता से लबालब है। शायद विपक्ष आप के इस पोस्ट का मूल्य अदा करता है? सकारात्मक रहिए और उसे ही फैलाइए। फीरी चाहिए तो वैशाली से दिल्ली शिफ्ट हो जाये।”

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