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NDTV के प्रणय रॉय ने ट्विटर पर किया ब्लॉक तो मालिनी पार्थसारथी ने पूछा- यही है आपकी अभिव्यक्ति की आजादी!

प्रेस क्लब में पत्रकारों ने कहा कि देश में आपातकाल जैसी स्थिति हो गई है और केंद्र की मोदी सरकार मीडिया का मुंह बंद कराने की कोशिश कर रही है।

एनडीटीवी के सह-संस्थापक प्रणय रॉय की फाइल फोटो।

एनडीटीवी के सह संस्थापक प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय के ठिकानों पर हुई सीबीआई छापेमारी के बाद यह चर्चा आम होने लगी कि मोदी सरकार प्रेस की आजादी पर प्रहार कर रही है। खुद प्रणय रॉय ने भी अपने वक्तव्य में इस ओर इशारा करते हुए कहा कि हम किसी भी सूरत में झुकने वाले नहीं हैं। इसी बीच जब प्रणय रॉय ने ‘द हिन्दू’ की पूर्व संपादक और सीनियर जर्नलिस्ट मालिनी पार्थसारथी को सोशल मीडिया ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया तो पार्थसारथी ने उन पर हमला बोल दिया। पार्थसारथी ने द्विटर पर ब्लॉक करने की सूचना देते हुए सवालिया लहजे में प्रणय रॉय से पूछा है कि क्या यही आपकी अभिव्यक्ति की आजादी है?

मालिनी पार्थसारथी ने इसके बाद कई ट्वीट किए। उन्होंने पूछा है कि अगर हमलोग पत्रकारिता जगत के मित्र हैं और हमारे ग्रुप के भीतर किसी मुद्दे पर इस कदर नाराजगी है तो फिर हमारी एकता की विश्वसनीयता कैसे कायम रह सकती है? उन्होंने यह भी लिखा है कि प्रेस की आजादी पर हमला की मुखालफत कर रहे चैम्पियन्स ही फ्री प्रेस की अनुमति नहीं दे रहे हैं। मालिनी पार्थसारथी ने यह भी लिखा है कि जब किसी राजनेता के ठिकानों पर सीबीआई का छापा पड़ता है तब हम उसे सही ठहराते हैं लेकिन जब हमारी बिरादरी के लोगों के ठिकानों पर यही छापेमारी होती है तो वह प्रेस पर हमला कहलाने लगता है।

बता दें कि कल (9 जून को) ही नई दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रणय रॉय के साथ-साथ कई बड़े पत्रकारों ने एक बैठक की, जिसमें विभिन्न मीडिया घरानों के पत्रकार शामिल हुए थे। इस बैठक में कुलदीप नैयर, एच के दुआ और अरुण शौरी भी मौजूद थे। इस दौरान पत्रकारों ने कहा कि देश में आपातकाल जैसी स्थिति हो गई है और केंद्र की मोदी सरकार मीडिया का मुंह बंद कराने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि आईसीआईसीआई बैंक को कथित तौर पर हानि पहुंचाने के मामले में सोमवार को प्रणय रॉय के घर और दफ्तर पर सीबीआई ने छापा मारा था। इस पर एनडीटीवी ने एक बयान जारी कर कहा था कि एनडीटीवी को परेशान करने के लिए झूठे आरोपों के आधार पर छापा मारा जा रहा है। संस्था ने अपने बयान में कहा कि, ‘हम भारत में लोकतंत्र और आज़ाद आवाज़ को कुचलने के इन प्रयासों के आगे झुकने वाले नहीं हैं।’