मोदी सरकार विदेश नीति में ‘दक्षिणपंथी झुकाव’ ला रही है: भाकपा

भाकपा ने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के शासनकाल में शुरू परमाणु असैनिक सहयोग मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अपने ‘तार्किक निष्कर्ष’ तक पहुंच गया है।

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भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी। (फाइल फोटो)

भारत-अमेरिका संयुक्त बयान पर गहरी आपत्ति जताते हुए भाकपा ने राजग सरकार पर देश की विदेश नीति में ‘पूरी तरह से दक्षिणपंथी झुकाव’ लाने का शनिवार (11 जून) को आरोप लगाया और आशंका जताई कि इसका अन्य देशों के साथ संबंधों पर ‘व्यापक नकारात्मक’ प्रभाव पड़ेगा। भाकपा ने एक बयान में कहा, ‘…. (संयुक्त) बयान ने साबित कर दिया है कि किसी सैन्य गठबंधन से दूर रहने के लंबे समय से कायम रुख को कमतर करते हुए हमारी विदेश नीति में पूरी तरह से दक्षिणपंथी झुकाव हो गया है।’

वाम दल ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के ‘लॉजिस्टिक’ आदान-प्रदान सहमति ज्ञापन (एलईएमओए) से पश्चिम एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र सहित विभिन्न देशों में वाशिंगटन की आक्रामकता का समर्थक होने का भारत पर आरोप लगने का खतरा पैदा हो गया है। पार्टी ने कहा कि इसका अन्य देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर भी व्यापक नकारात्मक असर होगा। भाकपा ने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के शासनकाल में शुरू परमाणु असैनिक सहयोग मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अपने ‘तार्किक निष्कर्ष’ तक पहुंच गया है।

संयुक्त बयान में नई दिल्ली को वाशिंगटन का ‘प्रमुख रक्षा सहयोगी’ बताए जाने तथा नरेंद्र मोदी सरकार के अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस से छह ‘बेकार और खराब’ परमाणु रिएक्टर खरीदने पर सहमत होने के साथ भाकपा ने भाजपा सरकार पर अमेरिका को खुश करने के लिए आगे बढ़ने का आरोप लगाया। पार्टी ने इन सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की मांग की।

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