मोदी सरकार ने लॉन्च किया ‘वैक्सीन गान’, थपथपाई अपनी पीठ तो उठे सवाल

टीकाकरण अभियान के दौरान भारत में कुल 6 वैक्सीन को मंजूरी मिली लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के जरिए निर्मित ऑक्सफोर्ड की कोविशील्ड और स्वदेश में विकसित कोवैक्सीन पर ही यह अभियान टिका हुआ है।

Corona Vaccine, Modi Government
प्रतीकात्मक तस्वीर(फोटो सोर्स: फाइल/PTI)।

कोरोना के कम होते मामलों के बीच 21 अक्टूबर को देश में कोविड-19 टीकों की संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच गई। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के विज्ञान और लोगों के सहयोग की विजय बताया। इसको लेकर केंद्र देशभर में उत्सव मना रही है। इस मौके पर केंद्र द्वारा एक “वैक्सीन गान” भी जारी किया गया है, जोकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भाषण के एक ऑडियो से प्रेरित है। जिसमें भारत को टीकों के लिए किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं होने की बात कही गई है।

इस तीन मिनट के ऑडियो में गायक-संगीतकार कैलाश खेर ने अपनी आवाज दी है। बता दें कि पीएम मोदी द्वारा वैक्सीन को लेकर किसी और देश पर निर्भर ना होने की बात पर केंद्र अपनी पीठ भी थपथपा रहा है, लेकिन इस बीच कुछ सवाल भी खड़े होते हैं। दरअसल इस अभियान के दौरान भारत में कुल 6 वैक्सीन को मंजूरी मिली है लेकिन सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के जरिए निर्मित ऑक्सफोर्ड की कोविशील्ड और स्वदेश में विकसित कोवैक्सीन पर ही यह अभियान टिका हुआ है।

लोगों का कहना है कि, पीएम मोदी की ‘वैक्सीन को लेकर किसी दूसरे देश पर निर्भर ना होने की बात’ तब ठीक होती, यदि वे केवल वैक्सीन उत्पादन की बात करते। बता दें कि रूस की स्पुतनिक-वी टीके की अपेक्षाकृत 1 मिलियन खुराक को छोड़कर, अन्य सभी का उत्पादन भारत में किया गया है। एक वैक्सीन से जुड़े शोधकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा “भारत में बनी कोई भी चीज मेड इन इंडिया है लेकिन कोविड-19 के टीके पूरी तरह से स्वदेशी हैं, यह कहना अनुचित होगा।”

वैज्ञानिक ने कहा कि हो सकता है कि पीएम के शब्द संभवत: सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोविशील्ड के बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने और कोवैक्सीन को विकसित करने के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और भारत बायोटेक द्वारा किए गए शोध को लेकर हों।

100 करोड़ डोज के बीच एक आंकड़ा यह भी: देश में कोरोना के टीकों की संख्या भले ही 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई हो लेकिन भारत में अभी 21 फीसदी ही ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगी है। बता दें कि ब्लूमबर्ग के वैक्सीन ट्रैकर से मिले आंकड़ों के मुताबिक भारत में 21 अक्टूबर तक देश में 51.2 प्रतिशत लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई। वहीं दोनों डोज लेने वालों की संख्या 21 फीसदी है।

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