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पिछले 20 महीने के दौरान राजग सरकार का कार्यकाल भ्रष्टाचार मुक्त: बारू

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने कहा है कि पिछले 20 महीनों के दौरान राजग सरकार का कार्यकाल भ्रष्टाचार मुक्त रहा है।

Author हैदराबाद | March 14, 2016 03:58 am
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने कहा है कि पिछले 20 महीनों के दौरान राजग सरकार का कार्यकाल भ्रष्टाचार मुक्त रहा है। लेकिन मीडिया के एक वर्ग का उसके प्रति विरोध इस चौथे स्तंभ से निबटने में उसका बेवकूफी भरा दृष्टिकोण है।
बारू ने शुक्रवार को हैदराबाद प्रेस क्लब और हैदराबाद पार्क द्वारा आयोजित ‘मोदी और मीडिया’ विषयक एक अंतर्संवाद सत्र में कहा, ‘मैं आपसे सहमत हूं। कुछ सामने नहीं आया है (भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं है)। निश्चित ही, सभी लोग आपसे कहते हैं कि यह भ्रष्टाचार के मामले में अच्छी सरकार है। खासकर पेट्रोलियम, उद्योग, दूरसंचार जैसे मंत्रालय में जहां पिछली सरकार (यूपीए दो) में कई बड़े भ्रष्टाचार के मामले हुए।’ उन्होंने कहा, ‘ये लोग ईमानदार व पारदर्शी हैं, यह आम धारणा है। मैं आपसे सहमत हूं।’

उन्होंने कहा कि लेकिन मीडिया का एक वर्ग राजग सरकार के प्रति कुछ बेवकूफी भरी बातों जैसे पत्रकारों को बिकाऊ कहना और उनके लिए उपलब्ध नहीं होना, की वजह से उसका विरोधी है। बारू ने कहा, ‘मीडिया के विरोध की वजह, पहले मैं नहीं मानता कि सभी मीडिया विरोधी हैं। ज्यादातर मीडिया अब भी मोदी का समर्थक है।’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन ज्यादातर विरोध कुछ इन बेवकूफी भरी बातों की वजह से हैं जैसे आप पत्रकारों को बिकाऊ कहते हैं, आप उन्हें अनुमति नहीं देते, आप उन्हें साक्षात्कार नहीं देते, आप संवाददाता सम्मेलन नहीं करते, आप पत्रकारों को खुश रखिए, वो आपको खुश रखेंगे।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी सरकार ने मीडिया के बगैर ही रहने का फैसला किया है तो उन्होंने कहा कि अब सरकार के अंदर दृष्टिकोण बन रहा है कि उसे मीडिया रणनीति की जरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार ने कहा, ‘यह सच है कि आपको चुनाव जीतने के लिए मीडिया की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब आप एक बार सत्ता में आ जाते हैं तो अपनी लोकप्रियता बनाए रखने के लिए आपको मीडिया की जरूरत होती है।’

उन्होंने मोदी की लोकप्रियता पर कहा, ‘यह बिल्कुल खुला मैदान है। अतएव वह प्रतिस्पर्धा में मीलोंं आगे हैं।’ दूसरी ओर संजय बारू ने कहा है कि अविभाजित आंध्रप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी ने 2008 में राज्य के विभाजन के यूपीए सरकार के कदम को रोक दिया था और सीमांध्र व तेलंगाना दोनों में ही कांग्रेस की हार का अनुमान लगाया था। उन्होंने कहा, ‘यह सच है। मैं आपको यह भी बता सकता हंू कि राजशेखर रेड्डी का विचार क्या था। जब वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भेंट करने आए तब मैं भी मौजूद था।’

बारू ने कहा, ‘उन्होंने कहा था, यदि हम तेलंगाना की घोषणा कर चुनाव में उतरते हैं तो हम न तो तटीय आंध्र में और न ही तेलंगाना में चुनाव जीतेंगे। वह कितना सच साबित हुए।’ उन्होंने कहा, ‘रेड्डी ने कहा था कि तटीय आंध्रप्रदेश में लोग हमसे नाराज हो जाएंगे, अतएव वे हमें वोट नहीं देंगे। तेलंगाना में, वे टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव को श्रेय देंगे और वे कांग्रेस को वोट नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि मैं आपको 29 सांसद देता हूं लेकिन यदि आपने राज्य के विभाजन की घोषणा की तब आपको शून्य सांसद मिलेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘मैं समझता हूं कि राजशेखर रेड्डी समझते थे कि यह घोषणा कांग्रेस को फायदा नहीं पहुंचाएगी। यह सच है। लेकिन क्या उससे आंध्र या तेलंगाना को फायदा पहुंचेगा या नहीं, यह अलग मुद्दा है।’ रेड्डी की 2009 में हेलिकॉप्टर हादसे में मृत्यु हो गई थी।

राज्य के विभाजन के कुछ महीने के अंदर हुए 2014 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस आंध्रप्रदेश में शून्य पर सिमट गई जबकि तेलंगाना में उसे महज 22 विधानसभा सीटें ही मिलीं। वर्ष 2014 के आम चुनाव में भी कांग्रेस आंध्रप्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत पाई और तेलंगाना में महज उसे दो सीटें मिलीं।

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