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एनडी तिवारी: ठुकरा दिया था पीएम पद, राजीव गांधी को यूं बदनाम होने से बचाया था

N D Tiwari News: डीपी नौटियाल द्वारा लिखित तिवारी की जीवनी, 'नारायण दत्त तिवारी-ए लाइफ स्टोरी' में कहा गया है कि जब राजीव गांधी बोफोर्स तोप सौदे में फंसे तब रक्षा मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे राजीव गांधी पर दबाव बढ़ गया था।

कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी। पीछे पीवी नरसिम्हा राव। (एक्सप्रेस आर्काइव)

कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी का गुरुवार (18 अक्टूबर) को 93 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। आज ही उनका जन्मदिन था। दो-दो राज्यों के मुख्यमंत्री बनने का गौरव तिवारी के नाम ही है। एनडी तिवारी का राजनीतिक करियर करीब पांच दशकों का है। वो यूपी और उत्तराखंड के सीएम, आंध्र प्रदेश के गवर्नर के अलावा केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके थे। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी दोनों की सरकार में तिवारी मंत्री रह चुके हैं। 1987 में जब केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी, तब तिवारी राजीव के मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री थे। कहा जाता है कि नारायण दत्त तिवारी पीएम बनते-बनते रह गए।

डीपी नौटियाल द्वारा लिखित तिवारी की जीवनी, ‘नारायण दत्त तिवारी-ए लाइफ स्टोरी’ में कहा गया है कि जब राजीव गांधी बोफोर्स तोप सौदे में फंसे तब रक्षा मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे राजीव गांधी पर दबाव बढ़ गया था। किताब के मुताबिक राजीव गांधी प्रधानमंत्री पद छोड़ने को तैयार हो गए थे। दरअसल, कांग्रेस पार्टी चाहती थी कि राजीव दो-तीन महीने के लिए पीएम पद छोड़ दें और मामला शांत होने के बाद फिर से पीएम बन जाएं। इस फैसले के बाद पीएम चेहरे के रूप में दो नेताओं के नाम पर चर्चा होने लगी। पहले चेहरा के तौर पर नरसिम्हा राव का नाम लगभग तय हो गया था लेकिव उत्तर भारत में गलत संदेश न चला जाय, इसलिए एनडी तिवारी का नाम उछला। किताब के मुताबिक, तिवारी के नाम पर कांग्रेस में सहमति बन गई थी। राजीव गांधी ने भी हां कर दिया था लेकिन जब प्रस्ताव एनडी तिवारी के पास पहुंचा तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

किताब के मुताबिक, एनडी तिवारी ने इसके पीछे तर्क दिया था कि अगर वो इस पेशकश को मान लेते हैं तो आम जनमानस के बीच यह संदेश जाएगा कि राजीव गांधी संकट से भागने की कोशिश कर रहे हैं। 62 साल के तिवारी की यह बात तब सभी को अच्छी लगी थी और राजीव गांधी पीएम पद पर बने रहे। हालांकि, 1989 के आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार हुई थी। बाद में बीजेपी के सहयोग से विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार बनी थी। 1987 से के बाद 1990-91 में भी एनडी तिवारी पीएम पद के चेहरे थे लेकिन पीवी नरसिम्हा राव 1991 में प्रधानमंत्री बनाए गए थे।

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