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एनसीपीसीआर लगाएगा पता, अल्पसंख्यक स्कूलों से कितना फायदा पा रहे बच्चे

एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा देश भर में 8.5 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उसमें काफी बड़ी संख्या अल्पसंख्यक बच्चों की है।

Author नई दिल्ली | May 23, 2017 02:04 am
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर)

संविधान के 93वें संशोधन के बाद अल्पसंख्यक स्कूलों से अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को क्या और कितना लाभ मिल पा रहा है, इस बात की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) 27 और 28 मई को सिक्किम में एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है। इस सम्मेलन में सभी राज्यों के बाल अधिकार संरक्षण आयोग अपने प्रदेश के अल्पसंख्यक स्कूलों का फीडबैक देंगे, जिसके आधार पर राष्ट्रीय आयोग सरकार को अपनी अनुशंसा भेजेगा। गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार (मुफ्त व अनिवार्य), 2009 अधिनियम के दायरे से अल्पसंख्यक स्कूल अभी बाहर हैं। ऐसे में इस पहली समीक्षा बैठक के नतीजे नीतिगत स्तर पर बदलाव लाने के लिए सरकार को प्रेरित कर सकते हैं।

एनसीपीसीआर के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा देश भर में 8.5 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं, उसमें काफी बड़ी संख्या अल्पसंख्यक बच्चों की है। इस बात की समीक्षा जरूरी है कि 93वें संविधान संशोधन के मद्देनजर अल्पसंख्यक बच्चों को जो लाभ मिलना चाहिए था, वह असल में कितना मिल पाया है। सम्मेलन में शिक्षा का अधिकार कानून, जेजे एक्ट, पोक्सो एक्ट व बाल मजदूरी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। 2005 में किए गए संविधान के 93वें संशोधन के जरिए अनुच्छेद 15 में खंड 5 को शामिल किया गया है। निजी गैर-वित्तपोषित संस्थानों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण जैसे विशेष प्रावधान किए गए, लेकिन अल्पसंख्यक संस्थानों को बाहर रखा गया। शिक्षा का अधिकार के तहत शर्त है गैर-वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों को भी कमजोर तबकों के 25 फीसद विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा देनी होगी। लेकिन 93वें संविधान संशोधन के कारण यह प्रावधान अल्पसंख्यक स्कूलों पर लागू नहीं है।

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