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काम के बाद ऑफिस की कॉल्‍स नजरअंदाज करने का मिले अधिकार, लोकसभा में पेश हुआ बिल

बिल के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के बाद नियोक्ता की कॉल्स का जवाब नहीं देता है तो नियोक्ता कर्मचारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगा।

Author January 9, 2019 10:43 AM
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में पेश किया राइट टु डिस्कनेक्ट बिल। (file pic)

करिश्मा मेहरोत्रा

एनसीपी सासंद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। इस बिल में कर्मचारियों को यह अधिकार देने की बात कही गई है, जिससे कर्मचारी ऑफिस के बाद अपने नियोक्ता की कॉल डिस्कनेक्ट कर सकेंगे। इस बिल को Right to Disconnect Bill नाम दिया गया है। सुले ने बिल पेश करते हुए लोकसभा में कहा कि राइट टु डिस्कनेक्ट बिल कंपनियों द्वारा कर्मचारियों पर लादी जाने वाली काम के बाद की अपेक्षाओं को नियंत्रित करेगा। एनसीपी सांसद ने कहा कि ‘इसे कर्मचारियों में तनाव कम होगा और वो अपनी पेशेवर और निजी जिंदगी में संतुलन बैठा सकेंगे।’

बता दें कि इससे मिलता-जुलता एक बिल फ्रेंच सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने देश में लागू किया गया था। इसके बाद यह न्यूयॉर्क में लागू किया गया। फिलहाल जर्मनी में इसे लागू करने पर चर्चा चल रही है। बीते 28 दिसंबर को लोकसभा में पेश किए गए राइट टु डिसकनेक्ट बिल के अनुसार, एक कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसमें आईटी, कम्यूनिकेशन और श्रम मंत्री को शामिल किया जाएगा। कर्मचारियों पर काम के घंटों के दौरान पड़ने वाले डिजिटल टूल्स के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा और उस पर सालाना एक रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। साथ ही बिल में कहा गया है कि कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण, कर्मचारी और नियोक्ता के बीच की शर्तों के एक चार्टर की रुपरेखा तैयार करे।

बिल के अनुसार, जिन कंपनियों में 10 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, वो अपने कर्मचारियों के साथ समय-समय पर विशिष्ठ शर्तों पर बात करें और फिर उन शर्तों को अपने चार्टर में शामिल करें। कंपनियों को एक कर्मचारी कल्याण समिति का गठन करने का भी बिल में उल्लेख है। इस समिति में कंपनी के कार्यबल के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बिल के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के बाद नियोक्ता की कॉल्स का जवाब नहीं देता है तो नियोक्ता कर्मचारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही सरकार कर्मचारियों को काउंसलिंग, डिजिटल डिटॉक्स सेंटर्स भी मुहैय्या कराएगी, ताकि कर्मचारी डिजिटल माध्यमों से इतर अपने आस-पास के लोगों के साथ भी जुड़ सके। सुप्रिया सुले ने द इंडियन एक्सप्रेस के सवाल के जवाब में बताया कि विभिन्न स्टडी में पता चला है कि जो कर्मचारी ऑफिस के बाद भी कई घंटे काम करते हैं या ऑफिस के संपर्क में बने रहते हैं, तो ऐसे लोगों में नींद की कमी और तनाव जैसी बीमारियों होने का खतरा बढ़ जाता है।

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