सुप्रीम कोर्ट के क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक को जब्त करने का आदेश दिया है। इस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन का ज़िक्र था। वहीं नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने शुक्रवार को ऑफिशियली लोगों और इंस्टीट्यूशन से इसकी सभी प्रतियां वापस करने और उससे जुड़ा डिजिटल कंटेंट डिलीट करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट के टेक्स्टबुक को जब्त करने का आदेश दिया।

NCERT ने क्या कहा?

NCERT सेक्रेटरी की तरफ से जारी एक बयान में काउंसिल ने निर्देश दिया कि फिजिकल कॉपी वापस भेजी जाएं और ऑनलाइन मटीरियल बिना देर किए हटा दिया जाए। बयान में कहा गया, “NCERT किसी भी व्यक्ति या ऑर्गनाइज़ेशन से रिक्वेस्ट करता है, जिसके पास NCERT टेक्स्टबुक एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, सोशल साइंस ग्रेड 8 पार्ट 2, या उससे जुड़ा कोई भी मटीरियल है, तो वे इसे जल्द से जल्द हेड, डिपार्टमेंट ऑफ़ एजुकेशन इन सोशल साइंसेज (DESS) या पब्लिकेशन डिवीज़न, NCERT (श्री अरबिंदो मार्ग, नई दिल्ली) को लौटा सकते हैं।”

बयान में आगे कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से एक खास चैप्टर के रेफरेंस हटा दिए जाएं। NCERT ने कहा, “हम यह भी रिक्वेस्ट करते हैं कि हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका चैप्टर से जुड़ा कोई भी कंटेंट अगर किसी भी सोशल मीडिया या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया गया है, तो उसे जल्द से जल्द डिलीट कर दिया जाए। साथ ही जिसने भी यह टेक्स्टबुक कहीं से भी खरीदी है, उनसे रिक्वेस्ट है कि वे इसे तुरंत NCERT को लौटा दें।”

NCERT का कदम गुरुवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच के कड़े शब्दों वाले ऑर्डर के बाद आया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि किताब की सभी कॉपी चाहे वे रिटेल दुकानों में हों या NCERT स्टॉक गोदामों में- वापस ली जाएं और डिजिटल वर्जन सभी प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएं। बेंच ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह यह पक्का करे कि स्कूल और टीचर इस किताब का इस्तेमाल न करें।

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एनसीईआरटी की एक किताब को लेकर उठे विवाद पर गुरुवार (26 फरवरी 2026) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि स्कूल एजुकेशन विभाग के सचिव भी कोर्ट में मौजूद हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एनसीईआरटी के नोटिस में माफी का एक भी शब्द नहीं है। पढ़ें पूरी खबर