राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की एक पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के उल्लेख की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। परिषद में किसी पुस्तक को तैयार करने के न केवल विभिन्न विशेषज्ञों की राय ली जाती है बल्कि कई स्तर पर समीक्षा व जांच होने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है।

पुस्तकें कोई एक लेखक नहीं लिखता

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यह ‘गलती’ कैसे हुई? एनसीईआरटी एक स्वायत्त संस्था है। इसके उद्देश्यों में पाठ्यपुस्तकों को तैयार व प्रकाशित करना भी शामिल है। आइए जानते हैं कि कोई पाठ्यपुस्तक किस प्रक्रिया से होकर विद्यार्थियों के हाथों तक पहुंचती है।

एक पाठ्यपुस्तक विकास समिति (टीडीसी) के एक सदस्य ने बताया कि किसी एनसीईआरटी किताब के छपने से पहले, उसे कई स्तर के अकादमिक और संस्थागत समीक्षा से गुजरना पड़ता है। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी की पुस्तकें कोई एक लेखक नहीं लिखता है। इसके लिए विशेषज्ञों का पूरा दल होता है।

समिति की बैठक में तय किया जाता है कि पुस्तक के किस भाग को कौन विशेषज्ञ लिखेगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले, एक आंतरिक अकादमिक समीक्षा होती है जिसमें एनसीईआरटी के विषय विभाग, संपादक और पाठ्यचर्या विशेषज्ञ अध्याय के मसौदे की जांच करते हैं। ये आमतौर पर कॉपी की सटीकता और वैचारिक स्पष्टता की जांच करते हैं। इसके बाद, बाह्य और आंतरिक विशेषज्ञों की समीक्षा होती है जिसमें अक्सर किसी विश्वविद्यालय के स्कॉलर और विषय विशेषज्ञ, सामग्री की गुणवत्ता और अकादमिक मजबूती को जांचते हैं। इसके बाद यह अंतिम मंजूरी के लिए मसौदा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या और शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति के पास जाता है।

पुस्तकों के विकास में शामिल चरण:

शिक्षा नीति : केंद्र सरकार समय-समय पर शिक्षा नीति में बदलाव करती है। केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार ने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) घोषित की। नई शिक्षा नीति ने वर्ष 1986 से चली आ रही शिक्षा नीति का स्थान लिया।
एनईपी-2020 का मसौदा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पूर्व प्रमुख कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक समिति ने तैयार किया।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीईआरटी)

एनसीईआरटी ने स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीईआरटी) तैयार की। एनसीईआरटी को तैयार करने के लिए एक निगरानी समिति बनाई गई जिसके अध्यक्ष कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन थे। समिति में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) के अध्यक्ष महेश चंद्र पंत, जामिया मिलिया इस्लामिया की कुलपति नजमा अख्तर, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा आदि लोग थे।

पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति (सीजी)

एनसीईआरटी के अध्यक्ष और सह-अध्यक्ष ने एनसीईआरटी के सहयोग से हर विषय के विशेषज्ञों के साथ सीजी का गठन किया। इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षाविद व विषय विशेषज्ञ, स्कूली शिक्षक, शिक्षाशास्र विशेषज्ञ और मुख्य सलाहकार और एनसीईआरटी के संकाय सदस्य भी शामिल होते हैं। हर सीजी में विषय के मुताबिक विशेषज्ञों की संख्या होगी। जैसे आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के लिए भी सीजी में 55 से अधिक विशेषज्ञ थे।