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16 साल बाद नवाज शरीफ ने कबूला- करगिल युद्ध भारत की पीठ पर छुरा घोंपने जैसा था, पर मैं किससे गिला करूं

नवाज शरीफ के बयान पर सरकार के सूत्रों ने कहा कि अभी तक इस बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।

Author इस्‍लामाबाद | February 18, 2016 4:32 PM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (फाइल फोटो)

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने माना कि करगिल युद्ध भारत की पीठ पर छुरा घोंपने जैसा था। उन्‍होंने एक टीवी शो में पैनल डिस्‍कशन के दौरान यह बात कबूली। पाकिस्‍तानी चैनल पर 15 फरवरी को आई खबर में बताया गया कि शरीफ ने एक जनसभा में करगिल युद्ध को भारत की पीठ पर छुरा घोंपने जैसा बताया। शरीफ ने भारत की ओर संबोधित करते हुए कहा कि बीच में एक बॉर्डर आ गया, बाकी आप और हम सब एक ही तरह के हैं। एक ही जमीन के मेंबरान हैं। शरीफ ने कहा कि आलू और गोश्‍त आप भी खाते हैं और हम भी खाते हैं। उन्‍होंने कहा कि वाजपेयी साहब ने इस बात का गिला किया था। उन्‍होंने कहा था कि जनाब एक तरफ तो लॉ ऑफ डिक्लियरेशन हो रहा है और दूसरी तरफ करगिल का मिसएडवेंचर देकर पीठ में छुरा घोंपा गया।

नवाज शरीफ ने कहा कि वाजपेयी साहब ठीक कहते हैं। उनकी जगह मैं भी होता तो यही कहता। उनकी पीठ में वाकई छुरा घोंपा गया था। शरीफ ने मजबूरी जताते हुए कहा कि लेकिन मैं ये गिला किससे करूं अब। उन्होंने कहा कि जिस रब को आप मानते हैं। उस रब को हम भी मानते हैं। उनसे ही गिला करूं। इधर, शरीफ के बयान पर सरकार के सूत्रों ने कहा कि अभी तक इस बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। लेकिन अगर यह सच है तो सकारात्‍मक बात है।

गौरतलब है कि 1999 में एक तरफ से भारत और पाकिस्‍तान के बीच बातचीत का दौर चल रहा था। इस कड़ी में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए थे। हालांकि कुछ ही दिनों बाद पाकिस्‍तान ने भारत में घुसपैठ कर चोटियों पर कब्‍जा कर लिया। इसकी परिणति करगिल युद्ध के रूप में हुई। पाकिस्‍तान को मुंह की खानी पड़ी। वहीं भारत ने कुल 527 जवानों को खोया।

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